
बरेली । मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर शिकायतों के निस्तारण को लेकर बरेली में बड़ा खुलासा सामने आया है। शासन स्तर पर हुई क्रॉस चेकिंग में पाया गया कि जिले में 13,411 शिकायतों का बिना वास्तविक समाधान किए ही निस्तारण दर्शा दिया गया। मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ताओं की समस्याओं का समाधान किए बिना ही पोर्टल पर उन्हें “निस्तारित” दिखा दिया गया था। शासन द्वारा की गई समीक्षा में यह अनियमितता उजागर होने के बाद अब संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जा रही है। कार्रवाई की जद में लेखपाल से लेकर एसडीएम स्तर तक के अधिकारी आ सकते हैं।
मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल का उद्देश्य आम जनता की शिकायतों का त्वरित और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना है, लेकिन बरेली में सामने आए इस मामले ने व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही या फर्जी रिपोर्ट लगाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद जिले के विभिन्न विभागों में दर्ज शिकायतों की दोबारा समीक्षा भी कराई जा सकती है।
यह मामला न केवल सरकारी शिकायत निवारण प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए जवाबदेही तय करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। अब सभी की निगाहें शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।


