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बरेली नगर निगम की फूड कोर्ट परियोजना पर उठे सवाल, करोड़ों रुपये की अनियमितता के आरोप

बरेली। बरेली नगर निगम की डीडीपुरम स्थित कुष्ठ आश्रम से सटी भूमि पर विकसित फूड कोर्ट परियोजना को लेकर विवाद गहरा गया है। रुहेलखंड उद्योग व्यापार मंडल ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये मूल्य की नगर निगम की भूमि को कथित रूप से मात्र 1.93 लाख रुपये में निजी कंपनी को देकर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। संगठन ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार महरोत्रा ने कहा कि नगर निगम की इस बहुमूल्य भूमि पर करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से फूड कोर्ट का निर्माण कराया गया है, लेकिन परियोजना के आवंटन और संचालन में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उनका आरोप है कि वर्षों से वहां कारोबार कर रहे छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडरों को बिना किसी प्रभावी पुनर्वास योजना के हटा दिया गया, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है।

संगठन का आरोप है कि एक निजी फर्म एडटेक को लाभ पहुंचाने के लिए बेहद कम दरों पर टेंडर जारी किया गया। व्यापार मंडल का दावा है कि करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति और परियोजना से जुड़े वित्तीय लेनदेन की निष्पक्ष जांच होने पर बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है। इस संबंध में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर विजिलेंस, आर्थिक अपराध शाखा या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई है।

वहीं, बरेली नगर निगम के नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परियोजना में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं हुई है। उनके अनुसार नगर निगम द्वारा शहर के विकास के लिए विभिन्न परियोजनाएं पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही हैं।

मामले को लेकर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन स्तर पर जांच के आदेश दिए जाते हैं या नहीं। यदि जांच होती है तो परियोजना से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

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