18 अगस्त को पूर्वांचल के आतंक का हुआ अंत: 50 हजार के इनामी कुख्यात सुजीत सिंह ‘बुढ़वा’ के एनकाउंटर की पूरी कहानी
तत्कालीन आजमगढ़ एसपी अजय साहनी ने स्वीकार की थी खुली चुनौती, मुठभेड़ में पुलिस टीम ने कुख्यात अपराधी को किया ढेर
आजमगढ़। पूर्वांचल के अपराध जगत में कभी आतंक का पर्याय रहे कुख्यात अपराधी और D-9 गैंग के सरगना सुजीत सिंह उर्फ ‘बुढ़वा’ का 18 अगस्त 2017 को पुलिस मुठभेड़ में अंत हो गया था। 50 हजार रुपये के इनामी इस अपराधी के खिलाफ हत्या, लूट, डकैती और रंगदारी समेत 40 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज बताए जाते थे।
यह मुठभेड़ उस समय के आजमगढ़ पुलिस कप्तान अजय साहनी के नेतृत्व में पुलिस के लिए बड़ी सफलता मानी गई थी। बाद में साहनी को उनके साहसिक पुलिस अभियानों के लिए प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
करीब एक दशक तक पूर्वांचल में रहा आतंक
मऊ जिले के चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के अल्देमऊ गांव निवासी सुजीत सिंह उर्फ ‘बुढ़वा’ ने कम उम्र में ही अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था। समय के साथ उसने हत्या, लूट, डकैती और रंगदारी जैसे गंभीर अपराधों का रास्ता अपनाया और पूर्वांचल के कुख्यात D-9 गैंग का सरगना बन गया।
आजमगढ़, मऊ समेत आसपास के कई जिलों में उसका नेटवर्क सक्रिय था। व्यापारियों और डॉक्टरों से रंगदारी वसूलना तथा विरोध करने वालों को निशाना बनाना उसके गिरोह की अपराध शैली का हिस्सा बताया जाता था।
दो हत्याओं के बाद पुलिस के निशाने पर आया
साल 2015 में सपा नेता विनय चौबे उर्फ झंडा और रवि मौर्य की हत्या के बाद सुजीत पुलिस के रडार पर आ गया। दिसंबर 2015 में पुलिस ने उसे कार्बाइन के साथ गिरफ्तार किया था।
सुजीत के जेल जाने के बाद उसके गिरोह की कमान अन्य सदस्यों ने संभाली। पुलिस कार्रवाई में गैंग के कई सदस्य एक-एक कर मारे गए, लेकिन सुजीत की कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी।
जेल से फरारी ने फिर बढ़ाई पुलिस की चुनौती
11 अगस्त 2017 की रात सुजीत को मऊ से रामपुर जिला कारागार ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में उसने शौच जाने का बहाना बनाकर पुलिस वाहन रुकवाया और पुलिसकर्मियों को चकमा देकर फरार हो गया।
फरारी के बाद उसने अपने पुराने साथी लालजी यादव के साथ मिलकर आजमगढ़ और जौनपुर के इलाकों में लूट समेत कई वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया। साथ ही वह अपने पुराने गिरोह को फिर से सक्रिय करने में जुट गया।
उसकी बढ़ती आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए एडीजी वाराणसी की ओर से उस पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया। बाद में इनाम की राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने की संस्तुति डीजीपी को भेजी गई।
एसपी अजय साहनी ने स्वीकार की खुली चुनौती
सुजीत के दोबारा सक्रिय होने से पूर्वांचल में पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। तत्कालीन आजमगढ़ एसपी अजय साहनी ने इस चुनौती को स्वीकार किया और सुजीत की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस टीमों को सक्रिय किया।
पुलिस उसकी गतिविधियों और संभावित ठिकानों की लगातार निगरानी कर रही थी।
18 अगस्त 2017: जब पुलिस से हुआ आमना-सामना
18 अगस्त 2017 की दोपहर शहर कोतवाल योगेंद्र बहादुर सिंह की टीम शारदा चौक पर वाहन चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान बाइक सवार दो संदिग्धों को रोकने का प्रयास किया गया।
पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। गोलीबारी में सिपाही आनंद घायल हो गए। इसके बाद दोनों बदमाश बाइक से सिधारी पुल होते हुए मुबारकपुर की ओर भाग निकले।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीमों ने पीछा शुरू कर दिया।
सठियांव से गजहड़ा तक चला पीछा
मुबारकपुर थाना प्रभारी अनूप शुक्ला की टीम ने बदमाशों की घेराबंदी की। पुलिस से खुद को घिरता देख बदमाश सठियांव चौराहे से आगे गजहड़ा स्थित खाली कांशीराम आवास कॉलोनी में घुस गए।
बताया जाता है कि बदमाशों ने दीवार की आड़ लेकर पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की।
इस दौरान एसओ मुबारकपुर और SWAT के सिपाही अवधेश सिंह घायल हो गए।
मुठभेड़ में ढेर हुआ 50 हजार का इनामी
पुलिस की जवाबी कार्रवाई में कुख्यात अपराधी सुजीत सिंह उर्फ ‘बुढ़वा’ मारा गया। उसका एक साथी मौके से फरार होने में सफल रहा।
इस कार्रवाई के साथ ही लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बने सुजीत के आतंक का अंत हो गया।
डीजीपी के दौरे से पहले मिली बड़ी सफलता
सुजीत का एनकाउंटर तत्कालीन डीजीपी के आजमगढ़ आगमन की पूर्व संध्या पर हुआ था। पुलिस के लिए यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि लंबे समय से फरार और आपराधिक गतिविधियों को दोबारा बढ़ाने वाले एक कुख्यात अपराधी को पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर किया था।
इस कार्रवाई को तत्कालीन एसपी अजय साहनी के नेतृत्व में आजमगढ़ पुलिस की बड़ी उपलब्धियों में गिना गया। उनके साहसिक अभियानों और उत्कृष्ट पुलिस कार्यों के लिए बाद में उन्हें प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया।
सुजीत के अंत के साथ खत्म हुआ आतंक का एक अध्याय
सुजीत सिंह उर्फ ‘बुढ़वा’ के मारे जाने के बाद मऊ, आजमगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में उसके आतंक से परेशान व्यापारियों और आम लोगों ने राहत की सांस ली।
18 अगस्त 2017 की वह मुठभेड़ पूर्वांचल के अपराध इतिहास में एक ऐसी घटना के रूप में दर्ज हुई, जिसमें लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बने एक कुख्यात अपराधी का अंत हुआ।


