
नागपुर/छिंदवाड़ा। सड़कों की बदहाल स्थिति और बढ़ते गड्ढों को लेकर सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हाल ही में छिंदवाड़ा के लिंगा रिंग रोड के समीप हुए सड़क हादसे में कृष्णा आगरे की मौत के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। परिजनों का आरोप है कि सड़क पर मौजूद गड्ढे के कारण यह हादसा हुआ।
नागरिकों का कहना है कि हर साल सरकार करोड़ों रुपये रोड टैक्स, टोल टैक्स और अन्य शुल्क के रूप में वसूलती है, लेकिन बरसात शुरू होते ही कई सड़कें गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जनता अपना दायित्व निभा रही है, तो सुरक्षित और गड्ढामुक्त सड़कें उपलब्ध कराना किसकी जिम्मेदारी है?
लोगों का आरोप है कि सड़कों की मरम्मत अक्सर कागजों तक सीमित रह जाती है। हर वर्ष गड्ढों के कारण दुर्घटनाएं होती हैं, लोग घायल होते हैं और कई परिवार अपनों को खो देते हैं, फिर भी स्थायी समाधान नजर नहीं आता। यदि समय पर रखरखाव और गुणवत्ता की निगरानी होती, तो क्या ऐसे हादसों को रोका जा सकता था?
अब मांग उठ रही है कि सड़क निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय की जाए, खराब सड़कों की तत्काल मरम्मत कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जनता पूछ रही है—क्या रोड टैक्स केवल वसूली के लिए है, या सुरक्षित सड़कें देना भी सरकार की जिम्मेदारी है?


