
बरेली। देश के कई शहरों में हाल के दिनों में हुए भीषण अग्निकांडों ने सार्वजनिक स्थानों पर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर किया है। लखनऊ और दिल्ली में आग की घटनाओं के बाद शासन-प्रशासन लगातार फायर सेफ्टी मानकों के पालन के निर्देश दे रहा है। इसके बावजूद बरेली एयरपोर्ट के आसपास संचालित कई ढाबों की सुरक्षा व्यवस्था और वैधानिक अनुमतियों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एयरपोर्ट रोड पर स्थित कई प्रतिष्ठान बिना फायर विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (Fire NOC) के संचालित हो रहे हैं। इन ढाबों पर शाम से देर रात तक बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ रहती है और यहां शराब पार्टियां भी आयोजित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में यदि किसी प्रकार की आगजनी या अन्य दुर्घटना होती है तो बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता।
लोगों का कहना है कि इन ढाबों पर एलपीजी सिलेंडरों, तंदूर और अन्य ज्वलनशील उपकरणों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है, लेकिन फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि क्षेत्र के लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि आबकारी विभाग की निगरानी वाले क्षेत्र में होने के बावजूद इन ढाबों पर नियमों के पालन की प्रभावी जांच नहीं हो रही है। यदि यहां शराब परोसी जा रही है या पार्टियां आयोजित की जा रही हैं, तो संबंधित विभागों द्वारा सुरक्षा और लाइसेंस संबंधी मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाना चाहिए।
अब सवाल यह है कि क्या इन ढाबों के पास फायर विभाग की वैध NOC है? क्या संबंधित विभागों ने इन प्रतिष्ठानों का सुरक्षा ऑडिट कराया है? और यदि नहीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?


