बरेली। कैंट थाना क्षेत्र के मानपुर चिकटिया में जमीन और रास्ते के विवाद को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाओं के आत्मदाह के प्रयास के मामले में पुलिस ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। पुलिस के मुताबिक, विवाद की सूचना मिलने के बाद चौकी इंचार्ज ने मौके पर ही लेखपाल से फोन पर संपर्क कर राजस्व स्थिति स्पष्ट कराने का प्रयास किया था। पुलिस का कहना है कि यदि उसी समय राजस्व विभाग का अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति स्पष्ट कर देता तो महिलाओं को अपनी शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचने की जरूरत नहीं पड़ती और संभवतः आत्मदाह जैसी घटना भी नहीं होती।
पुलिस के अनुसार, बुधवार सुबह गाटा संख्या 145 में निर्माण को लेकर विवाद की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद चौकी इंचार्ज हरेंद्र प्रताप सिंह ने लेखपाल से बातचीत कर जमीन और रास्ते की वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास किया।
पुलिस का कहना है कि मौके पर राजस्व अधिकारी के पहुंचने और तत्काल पैमाइश अथवा अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होने से विवाद वहीं समाप्त हो सकता था। लेकिन राजस्व टीम के तत्काल मौके पर नहीं पहुंचने के बाद कमलेश देवी जिला मजिस्ट्रेट परिसर पहुंच गईं और निर्माण कार्य रुकवाने की मांग करने लगीं।
पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक गाटा संख्या 139 और गाटा संख्या 145 के बीच राजस्व अभिलेखों में कोई रास्ता दर्ज नहीं है। मौके पर भी दोनों गाटों के बीच कोई रास्ता नहीं पाया गया।
संयुक्त टीम की पैमाइश में करीब तीन मीटर जमीन गाटा संख्या 139 की ओर अधिक पाई गई, जबकि गाटा संख्या 145 में कमलेश देवी और उनके पक्ष का कोई हिस्सा या मालिकाना हक नहीं पाया गया।
पुलिस के अनुसार, कमलेश देवी और उनके पक्ष के लोग पहले से ही करीब तीन मीटर जमीन पर कब्जा किए हुए बताए जा रहे हैं और अब उसी स्थान से रास्ते की मांग कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जिस गाटा संख्या 145 में रास्ते की मांग की जा रही है, उसमें संबंधित पक्ष का कोई वैधानिक हिस्सा या मालिकाना हक नहीं मिला है।
पुलिस के मुताबिक, राजस्व अभिलेखों में रास्ता नहीं होने के बावजूद रास्ता खुलवाने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। पुलिस ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर आत्मदाह का प्रयास करने को भी इसी विवाद के समाधान के लिए दबाव बनाने की अवैधानिक कोशिश बताया है।
हालांकि, महिलाओं की ओर से जमीन और रास्ते को लेकर अपने दावे किए गए हैं। इन दावों की वैधानिक स्थिति संबंधित न्यायालय और राजस्व प्रक्रिया के माध्यम से ही तय होगी।
पुलिस ने महिलाओं और उनके परिवार की ओर से लगाए गए पुलिस पर दबाव बनाने अथवा कार्रवाई नहीं करने के आरोपों को निराधार और अस्तित्वहीन बताया है। पुलिस के अनुसार, विवाद की सूचना मिलते ही पीआरवी और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची थी और दोनों पक्षों को सुनकर राजस्व विभाग से स्थिति स्पष्ट कराने का प्रयास किया गया था।
पुलिस का कहना है कि पुराने 60 गज के जमीन विवाद और बुधवार को सामने आए रास्ते के विवाद को अलग-अलग देखा जाना चाहिए। पुराने मामले में पहले ही दोनों पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और मामला सिविल न्यायालय में विचाराधीन है।
बुधवार के विवाद में जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर पैमाइश की। रिपोर्ट के मुताबिक मौके पर शांति व्यवस्था कायम है और आगे की कार्रवाई राजस्व एवं न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।


