बरेली। बरेली में GST धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क का पुलिस और GST SIT ने भंडाफोड़ करने का दावा किया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, फर्जी फर्मों और कथित फर्जी GST इनवॉइस के जरिए बड़े पैमाने पर बोगस ITC का खेल चलाया जा रहा था। इस पूरे नेटवर्क में 100 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने आने की बात सामने आई है। मामले में पुलिस और जांच टीम ने फरजान हाशमी समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे सिंडिकेट का नेटवर्क केवल बरेली तक सीमित नहीं था, बल्कि फर्जी दस्तावेजों और कंपनियों के जरिए लेनदेन की एक पूरी चेन तैयार की गई थी। आरोप है कि इस नेटवर्क में ऐसी फर्मों का इस्तेमाल किया जाता था, जिनके नाम पर वास्तविक कारोबार या माल की खरीद-फरोख्त के बिना ही GST इनवॉइस तैयार किए जाते थे।
फर्जी दस्तावेजों से तैयार होती थीं फर्में
पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर फर्जी आधार और पैन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी फर्में तैयार करते थे। इन फर्मों के नाम पर GST पंजीकरण कराया जाता था और इसके बाद कथित तौर पर बिना वास्तविक माल की सप्लाई के बिल जारी किए जाते थे।
इन्हीं बिलों के आधार पर बोगस ITC यानी Input Tax Credit का दावा किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के जरिए कितनी फर्में तैयार की गईं, कितने फर्जी इनवॉइस जारी किए गए और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोगों की भूमिका थी।
100 करोड़ से ज्यादा के संदिग्ध लेनदेन ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
जांच में 100 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने आने की बात पुलिस ने कही है। इतनी बड़ी रकम के लेनदेन सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों, फर्जी फर्मों, GST रिकॉर्ड और कथित इनवॉइस की पड़ताल तेज कर दी है।
जांच टीम यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी फर्मों के जरिए तैयार किए गए बिल किन-किन कंपनियों या कारोबारियों तक पहुंचाए गए और इस पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर पैसों का लेनदेन हुआ।
नेपाल भाग गया था फरजान हाशमी
पुलिस के मुताबिक, GST विभाग की कार्रवाई के बाद इस मामले में आरोपी फरजान हाशमी नेपाल भाग गया था। बताया जा रहा है कि वह वहां कथित तौर पर फर्जी नाम से रह रहा था और मोबाइल ऐप के जरिए अपने साथियों के संपर्क में था।
जांच एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों और नेटवर्क से जुड़े संपर्कों की जानकारी जुटाने के बाद कार्रवाई की और उसे गिरफ्तार किया। अब पूछताछ के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि नेपाल में रहने के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था और भारत में चल रहे कथित GST नेटवर्क को किस तरह संचालित किया जा रहा था।
सागर अग्रवाल को मुख्य सरगना बताया गया
पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना सागर अग्रवाल बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां सागर अग्रवाल समेत अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।
पुलिस और GST SIT अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि नेटवर्क में फर्जी फर्म तैयार करने से लेकर GST बिल जारी करने, कथित ITC क्लेम करने और पैसों के लेनदेन तक कौन-कौन लोग शामिल थे।
फर्जी फर्मों की पूरी चेन खंगाल रही SIT
मामले की जांच अब फर्जी फर्मों की पूरी चेन तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है। जांच एजेंसियां GST रजिस्ट्रेशन, बैंक खातों, इनवॉइस, दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।
इसके अलावा फरार आरोपियों की तलाश भी की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद इस नेटवर्क से जुड़े कुछ और नाम सामने आ सकते हैं।
बोगस ITC के खेल पर जांच एजेंसियों की नजर
दरअसल, GST व्यवस्था में ITC के जरिए कारोबारी अपनी खरीद पर दिए गए टैक्स का क्रेडिट ले सकते हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी व्यवस्था का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करते हुए इस नेटवर्क में बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के फर्जी इनवॉइस तैयार किए जाते थे और उनके आधार पर बोगस ITC का दावा किया जाता था।
अब SIT यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित फर्जीवाड़े से सरकार को वास्तविक रूप से कितने राजस्व का नुकसान हुआ और इस नेटवर्क में कितनी फर्जी कंपनियां और कितने लोग शामिल थे।
जांच के बाद और खुल सकते हैं राज
बरेली में सामने आए इस कथित GST फ्रॉड ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने आने के बाद अब जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
फिलहाल फरजान हाशमी समेत पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और GST SIT पूछताछ तथा दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी फर्मों और वित्तीय लेनदेन की पूरी कड़ी सामने आने के बाद इस मामले में और भी कार्रवाई हो सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस कथित GST सिंडिकेट का नेटवर्क आखिर कितना बड़ा था, कितनी फर्जी फर्में इसके जरिए संचालित की गईं और इस पूरे खेल में कौन-कौन लोग शामिल थे? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।


