उझानी के राजकीय इंटर कॉलेज में छात्राओं को कराटे एवं आत्मरक्षा के गुण सिखाए जा रहे, आत्मविश्वास और अनुशासन पर जोर

उझानी (बदायूं)। छात्राओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा माध्यमिक विद्यालयों में संचालित रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत उझानी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में छात्राओं को कराटे एवं सेल्फ डिफेंस का नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को आत्मरक्षा की तकनीकों के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस, अनुशासन, एकाग्रता और आत्मविश्वास का महत्व भी बताया जा रहा है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य राहुल सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा चलाया जा रहा रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण छात्राओं के लिए एक महत्वपूर्ण और उपयोगी पहल है। वर्तमान समय में प्रत्येक छात्रा के लिए यह आवश्यक है कि वह अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक हो और जरूरत पड़ने पर स्वयं का बचाव करने में सक्षम बने। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में चलाए जा रहे प्रयासों के तहत छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण मिलना निश्चित रूप से उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ छात्राओं को खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में भी भाग लेना चाहिए। नियमित व्यायाम और खेलों से शरीर स्वस्थ रहता है तथा मानसिक तनाव और कई तरह की परेशानियों को दूर करने में भी मदद मिलती है। कराटे जैसी विधाएं छात्राओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित करने में सहायक होती हैं।
विद्यालय के शिक्षक वीरेंद्र कुमार, धनवीर कुमार, रामवीर शर्मा, पुष्पेंद्र पाल, सुरजीत कुमार, हिमांशु यादव एवं दिनेश कुमार सहित विद्यालय के अन्य शिक्षकों ने भी आत्मरक्षा प्रशिक्षण को छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण बताया। शिक्षकों ने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद में रुचि लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का विकास होता है। नियमित खेलकूद और शारीरिक प्रशिक्षण से बच्चों में ऊर्जा, अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ता है।
प्रशिक्षण दे रहे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एवं मुख्य कराटे प्रशिक्षक शिहान बाबूराम सिंह ने छात्राओं को कराटे और आत्मरक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा केवल कराटे की कुछ तकनीकें सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने की प्रक्रिया है। प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को संतुलन, फुर्ती, सतर्कता, सही मुद्रा, बचाव की तकनीक और विपरीत परिस्थिति में संयम बनाए रखने का अभ्यास कराया जा रहा है।
शिहान बाबूराम सिंह ने कहा कि सीखने की उम्र में सीखी गई अच्छी आदतें जीवनभर काम आती हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अपने शरीर और स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए। नियमित अभ्यास से शरीर मजबूत और सक्रिय रहता है। उन्होंने छात्राओं को पर्याप्त नींद लेने, पौष्टिक एवं संतुलित खान-पान रखने तथा नियमित शारीरिक गतिविधि करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन कुछ समय अपने शरीर के लिए निकालना चाहिए और नियमित अभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कराटे प्रशिक्षण से छात्राओं में आत्मविश्वास, अनुशासन, एकाग्रता, शारीरिक संतुलन, फुर्ती और आत्मनिर्भरता जैसी क्षमताओं का विकास होता है। प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्राओं को डर पैदा करना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक, सतर्क और आत्मविश्वासी बनाना है, ताकि वे किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में घबराने के बजाय समझदारी और संयम के साथ अपनी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठा सकें।
विद्यालय में चल रहे इस प्रशिक्षण को लेकर छात्राओं में भी उत्साह देखने को मिल रहा है। छात्राएं कराटे की विभिन्न तकनीकों का अभ्यास कर रही हैं और प्रशिक्षण के माध्यम से अपने अंदर आत्मविश्वास महसूस कर रही हैं। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा के साथ आत्मरक्षा का ज्ञान छात्राओं के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विद्यालय परिवार ने सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखा जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक छात्राएं आत्मरक्षा के प्रति जागरूक हों और शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बन सकें।


