लेखा विभाग और छावनी परिषद के संयुक्त प्रयास से हुआ वृहद वृक्षारोपण, करीब 250 लोगों ने लिया हिस्सा
बरेली। पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए लेखा नगर कॉलोनी, आर.ए. बाजार, बरेली में लेखा विभाग एवं छावनी परिषद बरेली के संयुक्त तत्वावधान में ‘हरिशंकरी वाटिका’ के अंतर्गत वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान पीपल, बरगद, पाकड़ सहित विभिन्न प्रजातियों के 108 पौधों का रोपण किया गया। इस अवसर पर अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में करीब 250 लोगों की सहभागिता रही। उपस्थित लोगों ने पौधरोपण के साथ लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने का भी संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता की भावना विकसित करना भी रहा।
हरिशंकरी वाटिका का धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व
भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपरा में हरिशंकरी का विशेष महत्व माना जाता है। हरिशंकरी में पीपल को भगवान विष्णु, बरगद को भगवान शिव तथा पाकड़ को भगवान ब्रह्मा का प्रतीक माना जाता है। इन तीनों वृक्षों का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ पर्यावरणीय दृष्टि से भी विशेष योगदान है। इसी धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय भावना को आगे बढ़ाते हुए वाटिका में पौधरोपण किया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति और वृक्षों के संरक्षण की परंपरा सदियों से चली आ रही है। आज के समय में बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच इस परंपरा को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाना जरूरी है।
पौधे लगाना ही नहीं, उनकी देखभाल भी जरूरी : डॉ. तनु जैन
इस अवसर पर डॉ. तनु जैन, मुख्य अधिशासी अधिकारी, छावनी परिषद बरेली ने पौधरोपण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वृक्षारोपण को केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं माना जाना चाहिए। पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित देखभाल, सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति यदि अपने आसपास पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाए तो पर्यावरण को बेहतर बनाने में बड़ा योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया।
अधिकारियों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में जे.सी. त्रिपाठी, IFA, मनोज कुमार, Dy. IFA, LAO सहित लेखा विभाग एवं संबंधित कार्यालयों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने स्वयं पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि हरित क्षेत्र का विस्तार केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। पौधे आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, बेहतर पर्यावरण और संतुलित पारिस्थितिकी का आधार हैं।
प्रकृति संरक्षण के साथ संस्कृति का संदेश
हरिशंकरी वाटिका के माध्यम से एक ओर जहां पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया, वहीं दूसरी ओर भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति सम्मान और प्रकृति-पूजन की परंपरा को भी लोगों तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।


