
बरेली। जिला कारागार बरेली में निरक्षर बंदियों को शिक्षा से जोड़कर साक्षर बनाने की पहल की जा रही है। कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान की प्रेरणा और पुलिस महानिदेशक कारागार पीसी मीणा के निर्देशन में बंदियों की शिक्षा, सुधार, कौशल विकास और पुनर्वास के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के तहत 50 निरक्षर बंदियों को पढ़ना-लिखना सिखाया जा रहा है। इनमें पांच महिला बंदी भी शामिल हैं।
जिला कारागार प्रशासन के अनुसार साक्षरता कार्यक्रम की शुरुआत 11 अगस्त 2026 को हुई थी। इसका उद्घाटन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बरेली की सचिव जया प्रियदर्शिनी ने किया था। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत ये बंदी 20 सितंबर 2026 को होने वाली नवसाक्षर बंदी परीक्षा में हिस्सा लेंगे। परीक्षा में सफल होने वाले बंदियों को शिक्षा मंत्रालय की ओर से प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।
इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर जिला कारागार में समाजसेवी संस्था कोमल फाउंडेशन, फिरोजाबाद के सहयोग से बंदियों को प्रोत्साहित करने के लिए सुलेख प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में 50 नवसाक्षर बंदियों ने उत्साह के साथ भाग लिया।
प्रतियोगिता में बंदी सोहित ने प्रथम, राशिद ने द्वितीय और कृष्ण कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को कोमल फाउंडेशन फिरोजाबाद के अध्यक्ष अश्वनी कुमार भदौरिया की ओर से प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए गए।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव जया प्रियदर्शिनी ने बंदियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जेल में अपना समय खाली बैठकर व्यर्थ न गंवाएं, बल्कि कुछ पढ़-लिखकर अच्छा इंसान बनकर जेल से बाहर निकलें।
जेल अधीक्षक आलोक कुमार शुक्ला ने बताया कि बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जल्द ही साक्षरता के साथ व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास के कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, ताकि रिहाई के बाद वे आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
कार्यक्रम में जेल अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वयंसेवी संस्था के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। जेलर सुशील कुमार वर्मा ने अतिथियों और संस्था के प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।


