रिटायर्ड फौजी बोले—चुनाव के समय नेता आते हैं, जीतने के बाद पांच साल तक नजर नहीं आते
कॉलोनीवासियों में आक्रोश, अब उठी आवाज—“रोड नहीं तो वोट नहीं”
बरेली। बिथरी चैनपुर क्षेत्र के कांधरपुर स्थित गणेश धाम कॉलोनी में पिछले करीब 15 वर्षों से विकास कार्य नहीं होने का आरोप लगाते हुए कॉलोनीवासियों ने नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि वर्षों से सड़क, नाली, जल निकासी और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए वे जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

कॉलोनी की सबसे बड़ी परेशानी बरसात के दिनों में सामने आती है। बारिश होते ही कई स्थानों पर पानी भर जाता है और सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। जलभराव के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को होती है। बच्चों को पानी से होकर स्कूल जाने की मजबूरी बनी रहती है। अभिभावकों का कहना है कि सुबह के समय बच्चों को स्कूल भेजना भी चिंता का कारण बन जाता है।
प्लॉट खरीदा तो दिखाए गए थे विकास के सपने
कॉलोनी में रहने वाले सेवानिवृत्त सेना कर्मी हरीश टम्टा ने बताया कि जब यहां प्लॉटिंग हुई थी, तब लोगों को सड़क और बिजली के खंभों जैसी सुविधाएं दिखाई गई थीं। लोगों ने भरोसा करके प्लॉट खरीदे और धीरे-धीरे कॉलोनी में मकान बनने लगे। कॉलोनी आबाद होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि सड़क, नाली और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित होंगी, लेकिन 15 साल गुजरने के बाद भी उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
हरीश टम्टा के मुताबिक कॉलोनी में कई रिटायर्ड फौजी और पुलिसकर्मी भी रहते हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी देश और समाज की सेवा में लगाई। इसके बावजूद उन्हें अपने ही मोहल्ले में सड़क और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
चुनाव आते ही याद आती है जनता
कॉलोनीवासियों का आरोप है कि चुनाव के दौरान नेता और जनप्रतिनिधि यहां वोट मांगने पहुंचते हैं। उस समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं और लोगों को भरोसा दिलाया जाता है कि उनकी समस्याओं का समाधान कराया जाएगा। लेकिन चुनाव खत्म होने और जीत हासिल करने के बाद जनता की समस्याएं पीछे छूट जाती हैं।
हरीश टम्टा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “चुनाव के समय नेता हाथ जोड़कर नमस्कार करते हुए वोट मांगने आते हैं। चुनाव जीतने के बाद पांच साल तक कोई लौटकर नहीं आता। फिर अगला चुनाव आते ही वही चेहरे दोबारा दिखाई देने लगते हैं। इसी तरह 15 साल गुजर गए।”
सड़क और नाली के अभाव में बढ़ती परेशानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की स्थिति खराब होने और नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी निकल नहीं पाता। जलभराव के चलते पैदल चलने वालों के साथ-साथ बच्चों और बुजुर्गों को भी परेशानी होती है। कई बार लोगों को जरूरी काम के लिए भी पानी से होकर गुजरना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि समस्या किसी एक दिन की नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार बनी हुई है। शिकायतों और मांगों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से अब लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है।
विकास के दावों पर कॉलोनीवासियों का सवाल
कॉलोनीवासियों ने विकास के दावों पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सरकार और जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार विकास की बातें कही जाती हैं, लेकिन गणेश धाम कॉलोनी में पिछले 15 वर्षों की स्थिति देखकर जमीनी हकीकत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
लोगों का सीधा सवाल है कि जब जनता नियमित रूप से टैक्स और अन्य जिम्मेदारियां निभाती है तो उसके क्षेत्र में सड़क, नाली और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंच रही हैं?
2027 से पहले बड़ा मुद्दा बन सकती है नाराजगी
गणेश धाम कॉलोनी के लोगों की नाराजगी अब आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखी जा रही है। कॉलोनीवासियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक अपने मताधिकार का इस्तेमाल इस उम्मीद में किया कि उनके क्षेत्र का विकास होगा, लेकिन अब वे अपने वोट को विकास के मुद्दे से जोड़कर देख रहे हैं।
कॉलोनीवासियों के बीच उठ रही आवाज साफ है—
“15 साल बहुत होते हैं, अब आश्वासन नहीं काम चाहिए।”
लोगों का कहना है कि वे किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जो भी जनप्रतिनिधि उनके क्षेत्र से वोट मांगने आए, उससे पहले वे अपने क्षेत्र की सड़क, नाली और जल निकासी की स्थिति का जवाब मांगेंगे।
“रोड नहीं तो वोट नहीं” का नारा फिलहाल कॉलोनीवासियों की नाराजगी का प्रतीक बनता नजर आ रहा है।


