- बरेली। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बरेली में देशभक्ति और भाई-बहन के स्नेह से ओतप्रोत भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। विश्व हिंदू परिषद मातृ शक्ति की बहनों ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के वीर जवानों की कलाइयों पर राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान, स्नेह और कृतज्ञता व्यक्त की। इस दौरान बहनों ने जवानों को अपना भाई मानते हुए उनके स्वस्थ, सुरक्षित और दीर्घायु जीवन की कामना की।
रक्षा बंधन सामान्य तौर पर भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व माना जाता है, लेकिन जब रक्षा सूत्र देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात जवान की कलाई पर बंधता है तो उसका महत्व और भी बढ़ जाता है। आईटीबीपी के जवान अपने परिवार और अपनों से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की सुरक्षा में अपना कर्तव्य निभाते हैं। ऐसे में बहनों द्वारा जवानों को राखी बांधना उनके प्रति समाज के सम्मान और अपनत्व का भाव दर्शाता है।

राखी के साथ दिया भाई होने का भरोसा कार्यक्रम के दौरान बहनों ने आईटीबीपी जवानों की कलाइयों पर स्नेहपूर्वक राखी बांधी। राखी बांधते समय बहनों ने उनके सुरक्षित जीवन और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर भावनात्मक माहौल दिखाई दिया। बहनों का कहना था कि जवान भले ही अपने घर-परिवार से दूर हों, लेकिन देश की करोड़ों बहनें और माताएं उनके साथ खड़ी हैं।
बहनों ने कहा कि यह रक्षा सूत्र केवल एक धागा नहीं है, बल्कि देश की रक्षा करने वाले वीर जवानों के प्रति बहनों के प्रेम, सम्मान, विश्वास और आशीर्वाद का प्रतीक है। जवानों की वजह से देशवासी अपने घरों में सुरक्षित वातावरण में त्योहार मना पाते हैं।
देश की सुरक्षा में समर्पित जवानों को नमन कार्यक्रम में राष्ट्रसेवा में लगे आईटीबीपी के जवानों के त्याग और समर्पण को नमन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा करना आसान जिम्मेदारी नहीं है। विषम परिस्थितियों, कठिन मौसम और परिवार से लंबे समय तक दूर रहकर जवान अपने कर्तव्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।
रक्षाबंधन के अवसर पर जवानों की कलाइयों पर बंधी राखियों ने यह संदेश दिया कि राष्ट्र की सुरक्षा में लगे सैनिक अकेले नहीं हैं। पूरा देश उनके साथ है और उनके त्याग को सम्मान की नजर से देखता है।
बहनों ने जवानों के लिए की मंगलकामना राखी बांधने के दौरान बहनों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि सभी जवान स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और अपने परिवारों के साथ सुखद जीवन व्यतीत करें। बहनों ने देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सभी सैनिकों के साहस और सेवा भावना को नमन करते हुए कहा कि उनका समर्पण देश की आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
कार्यक्रम में साधना सिंह, मातृ शक्ति सह संयोजिका, बृज प्रांत; विद्योतमा आजाद, मातृ शक्ति संयोजिका, जिला आंवला; आशा सिंह, मातृ शक्ति सह संयोजिका, जिला आंवला; पूनम गंगवानी, प्रखंड संयोजिका सहित संगीता, स्वाति, नीलम, श्वेता एवं रश्मि समेत अन्य बहनों ने सहभागिता की।रक्षा सूत्र बना राष्ट्रप्रेम का प्रतीक इस अवसर पर रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के पारंपरिक रिश्ते से आगे बढ़कर राष्ट्र और राष्ट्ररक्षकों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गया। जवानों की कलाइयों पर बंधा प्रत्येक रक्षा सूत्र देशवासियों के उस विश्वास को दर्शाता है कि जो वीर जवान देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, उनके सम्मान और सुखद जीवन की कामना में पूरा समाज उनके साथ खड़ा है।


