बरेली।आज के दौर में बच्चों में मोबाइल फोन की बढ़ती लत चिंता का विषय बन गई है। घर हो या बाहर, कई बच्चे घंटों तक मोबाइल स्क्रीन से चिपके रहते हैं। कई बार तो मोबाइल को लेकर आपस में झगड़े तक हो जाते हैं। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर बुरा असर पड़ता है, आंखें लाल हो जाती हैं और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।
अंतरराष्ट्रीय कराटे खिलाड़ी बाबूराम सिंह ने कहा कि बच्चों को मोबाइल की दुनिया से बाहर निकालकर खेल और कराटे जैसी गतिविधियों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। कराटे न केवल आत्मरक्षा सिखाता है, बल्कि शरीर को फिट, अनुशासित और आत्मविश्वासी भी बनाता है। नियमित अभ्यास से बच्चों की एकाग्रता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है और वे स्वस्थ जीवनशैली अपनाते हैं।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को दिनभर मोबाइल देने के बजाय सुबह या शाम नियमित रूप से कराटे और व्यायाम के लिए प्रेरित करें। उनका कहना है कि “हर घर में मोबाइल होना जरूरी नहीं, बल्कि हर घर में स्वस्थ जीवन होना जरूरी है। जहां स्वास्थ्य है, वहीं खुशहाली और हरियाली है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चे नियमित रूप से खेलकूद और कराटे जैसी शारीरिक गतिविधियों में भाग लें, तो वे मोबाइल की लत से दूर रहेंगे और शारीरिक व मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ बनेंगे।


