
संतोष गंगवार की बेटी को बनाया उम्मीदवार, रुहेलखंड में OBC समीकरण साधने की कोशिश
बरेली। उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। भाजपा ने बरेली की श्रुति गंगवार को भी उम्मीदवार बनाया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार की उम्मीदवारी से बरेली की सियासत में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसे बरेली और रुहेलखंड की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
श्रुति गंगवार लंबे समय से बरेली में सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं। वह अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की चेयरमैन भी हैं। विभिन्न सामाजिक और भाजपा से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता नजर आती रही है। राज्यसभा का टिकट मिलने के बाद उनका राजनीतिक कद अब स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचने की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है।
गंगवार परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकेत
संतोष गंगवार बरेली की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। वह 1989 में पहली बार बरेली से लोकसभा पहुंचे थे और कई बार सांसद चुने गए। केंद्र की भाजपा सरकारों में उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। बाद में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
अब उनकी बेटी श्रुति गंगवार को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को भाजपा के संतोष गंगवार परिवार पर भरोसे और राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
OBC समीकरण पर भी नजर
बरेली और रुहेलखंड क्षेत्र में गंगवार यानी कुर्मी समाज की महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिका मानी जाती है। क्षेत्र के कई विधानसभा क्षेत्रों में यह समाज चुनावी समीकरणों को प्रभावित करता है। ऐसे में श्रुति गंगवार की उम्मीदवारी के जरिए भाजपा ने बरेली को प्रतिनिधित्व देने के साथ OBC वर्ग को भी राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
आठ उम्मीदवारों में श्रुति का नाम
भाजपा की घोषित सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार के नाम शामिल हैं। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में अलग-अलग सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व का संतुलन साधने की कोशिश की है।
श्रुति गंगवार की उम्मीदवारी से बरेली भाजपा में भी उत्साह का माहौल है। यदि वह राज्यसभा पहुंचती हैं तो यह उनके राजनीतिक करियर की महत्वपूर्ण शुरुआत होगी। साथ ही, राष्ट्रीय राजनीति में बरेली और रुहेलखंड की मौजूदगी को भी इससे नया प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद है


