
सपा नेता के नामी अस्पताल के बाहर लोहे की सीढ़ियों का ढांचा, राहगीरों की परेशानी का दावा; सवाल— निर्माण के दौरान कहां था नगर निगम का अमला?
बरेली। उत्तर प्रदेश में अवैध कब्जों और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार लगातार सख्ती के दावे करती है, लेकिन बरेली में बेग अस्पताल के बगल में बने लोहे के जीने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल से जुड़े सपा नेता ने नगर निगम की सरकारी जमीन पर कब्जा कर सीढ़ियों का निर्माण करा लिया है। और निर्माण के लिए नगर निगम से अनुमति नहीं ली गई, तो यह नगर निगम की कार्यप्रणाली और अतिक्रमण पर निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मौके पर हॉस्पिटल के बाहर लोहे की सीढ़ियों और प्लेटफॉर्म का बड़ा ढांचा दिखाई दे रहा है। यह ढांचा गली के एक हिस्से में फैला नजर आता है। स्थानीय लोगों को इससे आने-जाने में परेशानी होने का दावा किया जा रहा है।
निर्माण होता रहा, नगर निगम को भनक तक नहीं लगी?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर है। यदि सरकारी जमीन पर सीढ़ियों का निर्माण किया गया, तो क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था? क्या निर्माण के लिए कोई नक्शा या अनुमति ली गई थी? और यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध था, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
लोहे की सीढ़ियों जैसा ढांचा एक दिन में तैयार नहीं होता। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि निर्माण के दौरान संबंधित विभाग के अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी। क्या नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने इसकी अनदेखी की या फिर उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी?
भाजपा सरकार में भी नियमों से ऊपर हैं रसूखदार?
मामले में जिस अस्पताल और सपा नेता का जिक्र किया जा रहा है, उसे लेकर राजनीतिक सवाल भी उठ रहे हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह सवाल महत्वपूर्ण होगा कि क्या राजनीतिक रसूख के चलते सरकारी जमीन पर निर्माण होने दिया गया? भाजपा सरकार में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बीच किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति को नियमों से छूट नहीं मिलनी चाहिए।
अब नगर निगम को देना चाहिए जवाब
इस मामले में नगर निगम को जमीन की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि सीढ़ियां सरकारी जमीन पर बनी हैं, तो यह बताया जाना चाहिए कि निर्माण की अनुमति किसने दी और क्या संबंधित अधिकारियों ने कोई कार्रवाई की। वहीं, यदि निर्माण वैध है, तो नगर निगम को अनुमति और जमीन की सीमा से जुड़े तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए।
सीधा सवाल यही है— सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हुआ है तो कार्रवाई कब होगी? और अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है, तो नगर निगम इसकी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?
सरकारी जमीन जनता की संपत्ति है। उस पर किसी का भी अवैध कब्जा हो, कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए चाहे संबंधित व्यक्ति किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो।


