Homeउत्तर प्रदेशनकाटिया से नाथ गंगा तक बहेगी हरियाली की नई धारा

नकाटिया से नाथ गंगा तक बहेगी हरियाली की नई धारा

डॉ. तनु जैन के नेतृत्व में बरेली छावनी परिषद का बड़ा पर्यावरणीय अभियान, श्रमदान के साथ 11 हजार वृक्षों का वृहद पौधरोपण

बरेली । में नदी संरक्षण और पर्यावरण सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए बरेली छावनी परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. तनु जैन के नेतृत्व में बुधवार को “सेविंग द रिवर–नकाटिया से नाथ गंगा” अभियान चलाया गया। अभियान में नदी स्वच्छता, श्रमदान, नदी तटों के संरक्षण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को एक साथ जोड़ा गया। भारतीय सेना के जवानों, छावनी परिषद के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा विभिन्न सहभागी संस्थाओं ने अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई।

 


इस अभियान का उद्देश्य केवल नदी के आसपास सफाई करना नहीं, बल्कि नकाटिया नदी के संरक्षण, तटों के पर्यावरणीय पुनर्स्थापना और नकाटिया से नाथ गंगा तक एक व्यापक हरित कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास करना है। 11 हजार वृक्षों के वृहद वृक्षारोपण को इस अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में आगे बढ़ाया गया है।
डॉ. तनु जैन की पहल से नदी संरक्षण को मिला नया आयाम
बरेली छावनी परिषद द्वारा शुरू की गई इस पहल में नदी संरक्षण को व्यापक पर्यावरणीय दृष्टिकोण से जोड़ा गया है। डॉ. तनु जैन के नेतृत्व में परिषद ने नदी की स्वच्छता के साथ-साथ नदी तटों पर हरित आवरण बढ़ाने, पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
अभियान में नदी और उसके आसपास के चिन्हित क्षेत्रों में स्वयं श्रमदान करते हुए सफाई कार्य किया गया। नदी तटों पर जमा कचरे, मलबे और अवांछित सामग्री को हटाने के साथ उन स्थानों को भी व्यवस्थित किया गया जहां भविष्य में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित गतिविधियां संचालित की जानी हैं।
सेना के जवानों ने भी किया श्रमदान
“सेविंग द रिवर” अभियान में भारतीय सेना के जवानों की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। जवानों ने छावनी परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर नदी तटों की सफाई एवं श्रमदान में हिस्सा लिया।
इस सामूहिक भागीदारी ने यह संदेश दिया कि नदियों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रशासन, सेना, संस्थाओं और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही पर्यावरण संरक्षण को व्यापक रूप दिया जा सकता है।
11 हजार पौधों से तैयार होगा हरित कॉरिडोर
अभियान की सबसे बड़ी विशेषताओं में 11,000 वृक्षों का वृहद वृक्षारोपण शामिल है। नकाटिया से नाथ गंगा तक प्रस्तावित हरित कॉरिडोर के माध्यम से नदी तटों के आसपास हरित क्षेत्र को विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
वृक्षारोपण का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं है, बल्कि नदी के आसपास के पर्यावरण को मजबूत करना, जैव-विविधता के लिए बेहतर परिस्थितियां तैयार करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने की दिशा में काम करना है।
नदी के साथ विकसित होगा हरित और स्वच्छ पर्यावरण
नदी और पेड़-पौधों का संबंध पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दृष्टि से नकाटिया नदी के किनारे हरित क्षेत्र विकसित करने की पहल की गई है। अधिक वृक्षारोपण से नदी तटों के आसपास हरियाली बढ़ाने और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
“नकाटिया–नाथ गंगा ग्रीन कॉरिडोर” की परिकल्पना के तहत नदी तटों की स्वच्छता, पौधरोपण, जल संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
सफाई से आगे, नदी के पुनर्जीवन की दीर्घकालिक योजना
छावनी परिषद की यह पहल केवल एक दिन के सफाई अभियान तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य नदी संरक्षण को दीर्घकालिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाना है।
इसके तहत नदी की स्वच्छता के साथ नदी तटों का संरक्षण, हरित क्षेत्र का विस्तार, जल संरक्षण, पर्यावरणीय पुनर्स्थापना और स्थानीय लोगों की भागीदारी जैसे विषयों को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जनता की भागीदारी से बनेगा जन-अभियान
नदी संरक्षण तभी स्थायी रूप से सफल हो सकता है जब इसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित हो। इसी उद्देश्य से अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
लोगों में नदी को साफ रखने, नदी तटों पर कचरा नहीं डालने, लगाए गए पौधों की देखभाल करने और जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश
“सेविंग द रिवर–नकाटिया से नाथ गंगा” अभियान ने नदी संरक्षण को लेकर सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। बरेली छावनी परिषद, भारतीय सेना और अन्य सहभागी संस्थाओं की संयुक्त भागीदारी से आयोजित इस अभियान में श्रमदान, नदी स्वच्छता और 11 हजार वृक्षों के वृहद पौधरोपण को एक साथ जोड़ा गया।
डॉ. तनु जैन के नेतृत्व में छावनी परिषद द्वारा आगे बढ़ाई जा रही इस पहल का लक्ष्य नकाटिया नदी और उसके आसपास के क्षेत्र को अधिक स्वच्छ, हरित और पर्यावरणीय रूप से मजबूत बनाने की दिशा में निरंतर काम करना है। नकाटिया से नाथ गंगा तक हरित कॉरिडोर की परिकल्पना आने वाले समय में नदी संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता के लिए एक व्यापक अभियान का आधार बन सकती है।

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