राजकीय हाई स्कूल चौरासी जलालाबाद, शाहजहांपुर में छात्राओं को दी जा रही कराटे एवं आत्मरक्षा की ट्रेनिंग

शाहजहांपुर। छात्राओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से सरकार की ओर से संचालित रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत राजकीय हाई स्कूल चौरासी, जलालाबाद, शाहजहांपुर में छात्राओं को कराटे एवं आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को आत्मरक्षा के विभिन्न तरीकों के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस, अनुशासन, आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
विद्यालय की प्रधानाचार्य ममता राठौर ने कहा कि वर्तमान समय में छात्राओं का आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी होना बेहद जरूरी है। छात्राओं को शिक्षा के साथ-साथ अपनी सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा के गुर भी सीखने चाहिए। उन्होंने कहा कि कराटे केवल आत्मरक्षा का माध्यम ही नहीं, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने, अनुशासन विकसित करने और आत्मविश्वास बढ़ाने का भी प्रभावी साधन है। नियमित प्रशिक्षण से छात्राएं विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय समझदारी और आत्मविश्वास के साथ अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठा सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एवं मुख्य प्रशिक्षक मंजू रानी ने बताया कि आज के समय में बच्चों और विशेष रूप से छात्राओं के लिए कराटे एवं सेल्फ डिफेंस सीखना बहुत उपयोगी है। छात्राएं स्कूल आते-जाते समय बस, ट्रेन, साइकिल या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अलग-अलग परिस्थितियों का सामना कर सकती हैं। ऐसे में आत्मरक्षा का प्रशिक्षण उन्हें सतर्क रहने, आत्मविश्वास बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर अपनी सुरक्षा करने के लिए तैयार करता है।
उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ खेल और व्यायाम भी बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी हैं। कराटे प्रशिक्षण से शरीर में चुस्ती-फुर्ती आती है, शारीरिक क्षमता बढ़ती है और बच्चों में अनुशासन एवं आत्मविश्वास विकसित होता है। छात्राओं को यह समझना चाहिए कि आत्मरक्षा सीखना केवल किसी खतरे से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व को मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
मंजू रानी ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों को मोबाइल फोन पर अधिक समय बिताने के बजाय खेल, व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों से जोड़ें। लगातार मोबाइल का इस्तेमाल बच्चों की दिनचर्या और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। यदि बच्चों को नियमित रूप से खेल और व्यायाम की आदत डाली जाए तो वे अधिक सक्रिय और स्वस्थ रह सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कराटे एक ऐसा खेल है जिसमें आत्मरक्षा के साथ फिटनेस, अनुशासन, एकाग्रता और आत्मविश्वास का विकास होता है। बच्चों को कम उम्र से ही खेलों के प्रति प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। छात्राओं के लिए सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
विद्यालय में चल रहे प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्राओं को केवल कराटे की तकनीक सिखाना ही नहीं, बल्कि उन्हें सजग, आत्मविश्वासी, अनुशासित और शारीरिक रूप से सक्षम बनाना भी है। प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है और वे पूरे मनोयोग से कराटे के अभ्यास में भाग ले रही हैं।


