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दिल्ली के सत्य निकेतन में बड़ा हादसा: पांच मंजिला PG इमारत भरभराकर गिरी, 3 छात्रों की मौत

30 से 50 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका, कई घायल; NDRF, दमकल और पुलिस का युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

नई दिल्ली। दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम इलाके में स्थित सत्य निकेतन में रविवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक एक करीब पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। इमारत में छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट (PG) की सुविधा संचालित थी। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में छात्र व स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए।

ताजा जानकारी के मुताबिक, हादसे में कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। राहत एवं बचाव दल ने कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के अब भी मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। अलग-अलग रिपोर्टों में यह संख्या करीब 30 से 50 लोगों तक बताई गई है, हालांकि पुलिस ने अभी मलबे में फंसे लोगों की सटीक संख्या की पुष्टि नहीं की है।

बेसमेंट में चल रहा था काम, तभी भरभराकर गिरी इमारत

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस समय हादसा हुआ उस समय इमारत के बेसमेंट में मरम्मत या निर्माण संबंधी काम चल रहा था। हादसे के बाद इमारत की संरचनात्मक मजबूती, बेसमेंट में चल रहे काम और बारिश के कारण जमा पानी जैसे पहलुओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इमारत गिरने की वास्तविक वजह अभी आधिकारिक जांच का विषय है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले दिनों हुई लगातार बारिश के कारण बेसमेंट में पानी जमा होने की भी बात सामने आई है। आशंका जताई जा रही है कि पानी और निर्माण कार्य का इमारत की नींव पर क्या असर पड़ा, इसकी भी जांच की जाएगी।

छात्रों का इलाका होने से बढ़ी चिंता

सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के आसपास का प्रमुख छात्र आवास क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में छात्र PG, हॉस्टल और किराये के कमरों में रहते हैं। जिस इमारत में हादसा हुआ, उसमें भी छात्रों के रहने की व्यवस्था थी।

स्थानीय लोगों के अनुसार, आसपास की गलियों में बड़ी संख्या में PG और छात्रावास संचालित होते हैं। कई इमारतों में एक साथ बड़ी संख्या में छात्रों के रहने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। हादसे के बाद आसपास के अन्य PG और बहुमंजिला भवनों की सुरक्षा जांच की मांग भी तेज हो गई है।

30 से 50 लोगों के दबे होने की आशंका

इमारत के गिरते ही चारों तरफ धूल और मलबा फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना इतनी अचानक हुई कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कुछ लोगों के मलबे के नीचे फंसे होने की सूचना मिलने के बाद बचाव अभियान तेज कर दिया गया।

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के अनुसार, कुछ फंसे लोगों से संपर्क होने की बात भी सामने आई है। राहत दल मलबे को बेहद सावधानी से हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

NDRF, दमकल, पुलिस और DDMA की टीमें मौके पर

हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, NDRF, DDMA और अन्य आपातकालीन एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। एंबुलेंस और राहत दलों को भी लगाया गया है। मलबा हटाने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि जहां मशीनों से नुकसान की आशंका है वहां बचावकर्मी हाथों और छोटे उपकरणों की मदद से मलबा हटाकर लोगों की तलाश कर रहे हैं।

आसपास की गलियों के संकरी और भीड़भाड़ वाली होने के कारण राहत एवं बचाव वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल

हादसे के बाद इलाके में मौजूद अन्य बहुमंजिला इमारतों और PG की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में कई मकानों को PG में तब्दील कर दिया गया है और उनमें बड़ी संख्या में छात्रों को रखा जाता है।

हालांकि, किस इमारत को कितनी मंजिल बनाने की अनुमति थी, निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और किसी अधिकारी अथवा अन्य व्यक्ति की लापरवाही रही या नहीं—इन सभी सवालों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

इसी के साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि छात्र बहुल इलाकों में संचालित PG और हॉस्टल की फायर सेफ्टी, स्ट्रक्चरल सेफ्टी और भवन मानकों की नियमित जांच कितनी प्रभावी ढंग से की जा रही है।

प्रशासन ने जांच के दिए संकेत

हादसे के बाद दिल्ली सरकार और प्रशासन ने राहत-बचाव कार्य को प्राथमिकता देते हुए संबंधित एजेंसियों को मौके पर लगाया है। आसपास की एक इमारत को एहतियात के तौर पर खाली कराया गया है। हादसे की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की बात भी सामने आई है।

फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके बाद जांच में यह स्पष्ट होगा कि करीब 50 साल पुरानी बताई जा रही इस इमारत की संरचनात्मक स्थिति कैसी थी, बेसमेंट में किस तरह का काम चल रहा था और हादसे की असली वजह क्या रही।

हादसे ने खड़े किए कई बड़े सवाल

सत्य निकेतन की यह घटना सिर्फ एक इमारत के गिरने का मामला नहीं है, बल्कि दिल्ली के छात्र आवास क्षेत्रों में भवन सुरक्षा, PG संचालन, निर्माण नियमों और नियमित निरीक्षण व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है।

अब देखना होगा कि जांच में हादसे के लिए कौन-कौन से कारण सामने आते हैं और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ प्रशासन क्या कार्रवाई करता है। फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

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