कराटे के साथ स्वास्थ्य, फिटनेस और महिला सशक्तिकरण की दी जा रही जानकारी
बदायूं/उझानी। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं को आत्मनिर्भर और आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा संचालित रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत छात्राओं को कराटे एवं आत्मरक्षा के विभिन्न गुण सिखाए जा रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान बालिकाओं को आत्मरक्षा के साथ महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, फिटनेस, अनुशासन और आत्मविश्वास के महत्व की भी जानकारी दी जा रही है।

राजकीय हाई स्कूल सिकन्द्राबाद, उझानी की प्रधानाचार्य सुश्री डेज़ी फ़ज़ल ने छात्राओं को रानी लक्ष्मीबाई के साहस और वीरता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई महिलाओं के लिए साहस, आत्मविश्वास और संघर्ष की प्रेरणास्रोत हैं। सरकार द्वारा चलाया जा रहा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बालिकाओं को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विद्यालय की नोडल अध्यापिका श्रीमती राखी ने कहा कि वर्तमान समय में बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा सीखना बेहद जरूरी हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक छात्राएं प्रतिदिन घर से विद्यालय तक पैदल आती-जाती हैं। ऐसे में रास्ते में किसी प्रकार की परेशानी या असुरक्षित स्थिति उत्पन्न होने पर आत्मरक्षा का ज्ञान उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करता है। उन्होंने छात्राओं को सतर्क, जागरूक और आत्मविश्वासी रहने के लिए प्रेरित किया।
अध्यापिका श्रीमती अंजू ने कहा कि कराटे केवल आत्मरक्षा का प्रशिक्षण नहीं बल्कि शारीरिक और मानसिक विकास का भी माध्यम है। नियमित अभ्यास से शरीर सक्रिय रहता है, एकाग्रता बढ़ती है और छात्राओं में अनुशासन तथा आत्मविश्वास का विकास होता है।
राजकीय हाई स्कूल दहेमू की प्रधानाचार्य श्रीमती विनीता यादव ने भी छात्राओं को महिला सशक्तिकरण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बालिकाओं को शिक्षा के साथ आत्मरक्षा का ज्ञान होना भी आवश्यक है। छात्राओं को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ उन्हें शारीरिक रूप से सक्रिय और आत्मविश्वासी बनाना जरूरी है।
वहीं राजकीय इंटर कॉलेज बुर्रा अहिरवारा (बोंदरी) के प्रधानाचार्य राहुल सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा बालिकाओं के लिए चलाया जा रहा रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम बेहद उपयोगी है। वर्तमान समय में लड़कियों के लिए सेल्फ डिफेंस सीखना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ आत्मरक्षा का ज्ञान बालिकाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में सहायता करता है।
कराटे से आत्मरक्षा के साथ फिटनेस पर भी जोर
प्रशिक्षण दे रहे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बाबूराम सिंह ने बताया कि वह काफी समय से बालिकाओं को कराटे और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में महिलाओं और बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा का प्रशिक्षण बहुत महत्वपूर्ण है। कराटे के माध्यम से छात्राओं को विपरीत परिस्थितियों में स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कौशल सिखाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि कराटे का संबंध केवल आत्मरक्षा से नहीं है। नियमित अभ्यास से शरीर सक्रिय रहता है और फिटनेस बेहतर होती है। वर्तमान समय में खान-पान और दिनचर्या में बदलाव के कारण बच्चों और युवाओं में शारीरिक सक्रियता कम हो रही है तथा वजन बढ़ने जैसी समस्याएं भी देखने को मिल रही हैं। ऐसे में नियमित व्यायाम, खेलकूद और कराटे जैसी गतिविधियों को दिनचर्या का हिस्सा बनाना लाभदायक है।
उन्होंने छात्राओं को संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त आराम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर, आत्मविश्वास और जागरूकता के साथ बालिकाएं अपने भविष्य को और बेहतर बना सकती हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में छात्राओं को आत्मरक्षा की बुनियादी तकनीकों के साथ सतर्क रहने, खतरे की स्थिति को पहचानने, आत्मविश्वास बनाए रखने और सुरक्षित तरीके से सहायता लेने की जानकारी भी दी जा रही है। रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से बालिकाओं में सुरक्षा, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, अनुशासन और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।


