
बरेली। दिल्ली में प्रस्तावित किसान आंदोलन में शामिल होने जा रहे भारतीय किसान यूनियन के दो प्रमुख पदाधिकारियों को पुलिस द्वारा कथित तौर पर नजरबंद किए जाने का मामला सामने आया है। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष केशव सिंह सोलंकी और जिला महासचिव अर्जुन यादव को पुलिस ने मुड़िया अहमदनगर स्थित यूनियन कार्यालय में रोक दिया। बताया जा रहा है कि दोनों किसान नेता दिल्ली में आयोजित किसान आंदोलन में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उन्हें कार्यालय से बाहर जाने से रोक दिया। इस कार्रवाई के बाद किसानों के आंदोलन में शामिल होने की स्वतंत्रता और पुलिस की एहतियाती व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दिल्ली कूच से पहले मुड़िया अहमदनगर पहुंची पुलिस
प्राप्त जानकारी के मुताबिक भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष केशव सिंह सोलंकी और जिला महासचिव अर्जुन यादव शुक्रवार को दिल्ली में प्रस्तावित किसान आंदोलन में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे। दोनों पदाधिकारी मुड़िया अहमदनगर स्थित भारतीय किसान यूनियन के कार्यालय में मौजूद थे।
इसी दौरान पुलिस वहां पहुंची और दोनों किसान नेताओं को कथित तौर पर कार्यालय में ही रोक दिया। बताया जा रहा है कि पुलिस की इस कार्रवाई के कारण दोनों पदाधिकारी दिल्ली के लिए रवाना नहीं हो सके।
हालांकि, पुलिस ने दोनों नेताओं को किस आधार पर रोका और क्या इस संबंध में कोई लिखित आदेश जारी किया गया था, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
किसान आंदोलन में शामिल होने की थी तैयारी
भारतीय किसान यूनियन किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाता रहा है। फसलों के उचित दाम, न्यूनतम समर्थन मूल्य, किसानों की आर्थिक परेशानियां और कृषि से जुड़े अन्य मुद्दे किसान संगठनों की प्रमुख मांगों में शामिल रहे हैं।
इसी क्रम में दिल्ली में प्रस्तावित किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए बरेली के किसान नेताओं के जाने की जानकारी सामने आई थी।
जिलाध्यक्ष केशव सिंह सोलंकी और जिला महासचिव अर्जुन यादव भी आंदोलन में अपनी भागीदारी दर्ज कराने की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, दिल्ली में आयोजित होने वाले इस विशेष आंदोलन की मांगों और कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
कार्यालय में ही रोके गए दोनों किसान नेता
जानकारी के अनुसार, पुलिस की मौजूदगी के बीच दोनों किसान नेताओं को मुड़िया अहमदनगर स्थित यूनियन कार्यालय में ही रहना पड़ा।किसान नेताओं को दिल्ली जाने से रोकने की कार्रवाई के पीछे पुलिस का क्या उद्देश्य था, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। यह भी जानकारी सामने नहीं आई है कि दोनों पदाधिकारियों को कितने समय तक रोका गया और बाद में उन्हें दिल्ली जाने की अनुमति दी गई या नहीं।
पुलिस की कार्रवाई पर उठे कई सवाल
इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस ने किसी संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी स्थिति को देखते हुए एहतियाती कदम उठाया था या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि दिल्ली किसान आंदोलन में शामिल होने जा रहे अन्य किसान पदाधिकारियों को भी इसी तरह रोका गया या कार्रवाई केवल इन दो नेताओं तक सीमित रही।किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल होने का अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी, दोनों ही इस मामले में महत्वपूर्ण पहलू हैं।
पुलिस के आधिकारिक पक्ष का इंतजार
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष केशव सिंह सोलंकी और जिला महासचिव अर्जुन यादव को कथित तौर पर नजरबंद किए जाने के मामले में पुलिस का आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है।पुलिस की ओर से कार्रवाई के कारण, उसकी अवधि और कानूनी आधार की जानकारी मिलने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल बरेली के मुड़िया अहमदनगर स्थित भारतीय किसान यूनियन कार्यालय में दिल्ली आंदोलन के लिए रवाना होने से पहले जिलाध्यक्ष केशव सिंह सोलंकी और जिला महासचिव अर्जुन यादव को पुलिस द्वारा कथित तौर पर नजरबंद किए जाने का मामला चर्चा में है। अब देखना होगा कि पुलिस इस कार्रवाई को लेकर क्या स्पष्टीकरण देती है और किसान संगठन की आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।


