मूल वीडियो में सलवार-कमीज में नजर आ रही थीं महिला, वायरल क्लिप में AI से बदला गया रूप; मामले ने खड़े किए गंभीर सवाल
हरिद्वार। हरिद्वार की हरकी पैड़ी में गंगा स्नान से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। वायरल वीडियो में महिला को आपत्तिजनक रूप में दिखाया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। हालांकि फैक्ट-चेक में सामने आया है कि वायरल वीडियो वास्तविक नहीं है, बल्कि इसमें AI तकनीक की मदद से डिजिटल छेड़छाड़ की गई है।

फैक्ट-चेक रिपोर्ट के मुताबिक, वायरल वीडियो में दिखाई दे रही महिला की पहचान सोनम यादव नाम की क्रिएटर के रूप में की गई है। जांच के दौरान उनका मूल वीडियो सोशल मीडिया अकाउंट पर मिला, जिसे 6 जून को पोस्ट किया गया था। मूल वीडियो में सोनम यादव सलवार-कमीज पहनकर गंगा स्नान करती हुई नजर आ रही थीं। वायरल किए गए वीडियो में इसी मूल फुटेज के साथ डिजिटल तरीके से बदलाव कर महिला के कपड़ों को अलग रूप में दिखाया गया।
एक ही जगह और एक जैसे दृश्य से खुला मामला
जांच के दौरान मूल और वायरल वीडियो की तुलना करने पर दोनों में आसपास का स्थान, लोग और बैकग्राउंड काफी हद तक एक जैसा पाया गया। मुख्य अंतर महिला के कपड़ों को लेकर दिखाई दिया। इससे संकेत मिला कि मूल वीडियो को आधार बनाकर उसके साथ डिजिटल छेड़छाड़ की गई और फिर उसे भ्रामक दावे के साथ सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया।
AI तकनीक के दुरुपयोग पर सवाल
इस मामले ने एक बार फिर AI और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ा दी है। तकनीक के माध्यम से किसी वास्तविक व्यक्ति के वीडियो में बदलाव कर उसे ऐसी स्थिति में दिखाया जा सकता है, जो वास्तविक घटना में हुई ही नहीं। ऐसे वीडियो तेजी से वायरल होने पर संबंधित व्यक्ति की छवि और निजता को नुकसान पहुंच सकता है।
फैक्ट-चेक के दौरान वीडियो को AI डिटेक्शन टूल से भी जांचा गया। रिपोर्ट के अनुसार, Hive Moderation ने वीडियो के AI-जनित होने की संभावना 50.6 प्रतिशत बताई और इसे Seedance 2 वीडियो जनरेशन मॉडल से बनाए जाने का अनुमान दिया। हालांकि ऐसे डिटेक्शन टूल के परिणामों को अकेले अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए; इस मामले में मूल वीडियो से तुलना भी महत्वपूर्ण रही।
सोनम यादव ने शिकायत कर कार्रवाई की मांग की
वायरल वीडियो को लेकर सोनम यादव की ओर से भिवाड़ी, हरियाणा क्राइम ब्रांच में शिकायत किए जाने और वीडियो में AI के माध्यम से छेड़छाड़ कर उसे वायरल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मामले में शिकायत के बाद अब यह महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित एजेंसियां वायरल वीडियो को किसने तैयार किया, उसमें किस स्तर पर डिजिटल बदलाव किया गया और उसे सोशल मीडिया पर किस तरह प्रसारित किया गया—इन पहलुओं की जांच कैसे करती हैं।
बिना पुष्टि वायरल वीडियो शेयर न करें
इस पूरे मामले से सोशल मीडिया यूजर्स के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश सामने आता है। किसी भी वायरल वीडियो को देखकर तुरंत उसे वास्तविक घटना मान लेना उचित नहीं है। खासकर ऐसे वीडियो, जिनमें किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा या निजी जीवन से जुड़ा संवेदनशील दावा किया जा रहा हो, उन्हें बिना पुष्टि आगे साझा करने से बचना चाहिए।
हरिद्वार के गंगा स्नान से जुड़े इस मामले में उपलब्ध फैक्ट-चेक के अनुसार वायरल वीडियो वास्तविक रूप में रिकॉर्ड किया गया वीडियो नहीं, बल्कि मूल वीडियो में AI की मदद से की गई डिजिटल छेड़छाड़ का परिणाम है।


