खिलाड़ियों ने दिखाया शानदार प्रदर्शन, कराटे की बारीकियों के साथ अनुशासन और आत्मविश्वास का भी दिया संदेश
काशीपुर, उत्तराखंड। नटराज मार्शल आर्ट योगा एवं डांस अकादमी, काशीपुर में 13 सितंबर को कराटे बेल्ट परीक्षा का आयोजन किया गया। परीक्षा में अकादमी के 25 खिलाड़ियों ने उत्साह के साथ प्रतिभाग किया और सभी खिलाड़ियों ने सफलता प्राप्त कर अपनी-अपनी योग्यता के अनुसार बेल्ट हासिल की। परीक्षा के दौरान खिलाड़ियों ने कराटे की विभिन्न तकनीकों, शारीरिक दक्षता, अनुशासन और आत्मविश्वास का शानदार प्रदर्शन किया।

अकादमी के डायरेक्टर सेंसई मिंटू कुमार सैनी ने बताया कि बेल्ट परीक्षा खिलाड़ियों की मेहनत और नियमित प्रशिक्षण का मूल्यांकन करने का महत्वपूर्ण अवसर होती है। कराटे में प्रत्येक बेल्ट केवल एक स्तर की पहचान नहीं होती, बल्कि खिलाड़ी के अनुशासन, तकनीकी ज्ञान, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास को भी दर्शाती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को छोटी उम्र से ही खेलों से जोड़ना उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए काफी उपयोगी है।
बेल्ट परीक्षा शिहान शमशेर अली द्वारा ली गई। उन्होंने खिलाड़ियों के प्रदर्शन का बारीकी से मूल्यांकन करते हुए उन्हें कराटे की तकनीकों और बारीकियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास, अनुशासन और धैर्य के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
यलो बेल्ट में पारस सिंह, दैविक बवाड़ी, हर्ष बिष्ट और अभिषेक गिरी ने सफलता प्राप्त की। ऑरेंज बेल्ट में आर्यन सिंह, संगम, प्रिशा प्रकाश और रिदित कुमार सफल रहे। ग्रीन बेल्ट अनिका और शौर्य चिल्वाल ने हासिल की।
ब्लू बेल्ट में वैष्णवी रावत, रिया रावत, अंश रावत, दीपांशु मेर, रितिका चौहान, हिताक्षि बिष्ट और प्रथव डोलिया ने परीक्षा उत्तीर्ण की। पर्पल बेल्ट में पार्थ धामी, इश्मित कौर, शौर्य बिष्ट, प्रिशा शर्मा और नीतू चौहान सफल रहे। वहीं ब्राउन बेल्ट में मुद्रिका शर्मा, हितीक्षा फर्तियाल और अंशदीप कौर ने सफलता हासिल की। परीक्षा में हितीक्षा, अंशदीप और मुद्रिका शर्मा का प्रदर्शन विशेष रूप से सराहनीय रहा।
कराटे बच्चों के भविष्य के लिए भी उपयोगी
कराटे केवल आत्मरक्षा सीखने का माध्यम ही नहीं है, बल्कि यह बच्चों में अनुशासन, एकाग्रता, आत्मविश्वास, धैर्य, शारीरिक फिटनेस और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में भी मदद करता है। नियमित प्रशिक्षण से बच्चे अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाना सीखते हैं। खेल गतिविधियों से बच्चों में टीम भावना और लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करने की आदत भी विकसित होती है।
कराटे में खिलाड़ी धीरे-धीरे अलग-अलग स्तर की बेल्ट प्राप्त करते हुए आगे बढ़ते हैं। इससे बच्चों को मेहनत का परिणाम स्वयं देखने को मिलता है और उनमें अपने लक्ष्य के प्रति लगन बढ़ती है। आगे चलकर प्रतिभावान खिलाड़ी जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर खेल के क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकते हैं। खेलों में उपलब्धियां बच्चों के आत्मविश्वास और भविष्य के अवसरों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
मोबाइल से दूरी, खेलों से जुड़ाव जरूरी कार्यक्रम के दौरान बच्चों को नियमित रूप से खेल और शारीरिक गतिविधियों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया गया। आज के समय में बच्चे मोबाइल और स्क्रीन पर काफी समय बिताते हैं। ऐसे में कराटे जैसे खेल बच्चों को सक्रिय रखने के साथ उन्हें अनुशासन और समय का महत्व समझाने में सहायक हो सकते हैं। अभिभावकों को भी बच्चों को पढ़ाई के साथ खेलों के लिए समय देने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
ऋषिकेश चैंपियनशिप के विजेताओं का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान पिछले माह ऋषिकेश में आयोजित ऑल इंडिया शोतोकान कराटे चैंपियनशिप में विजेता खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। अतिथियों ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अगरपाल सिंह यादव, शाकेत शर्मा, बिट्टू राणा और डॉ. रिचा पंडित ने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ खेलों से जोड़ना समय की जरूरत है। खेल बच्चों को स्वस्थ रहने के साथ आत्मविश्वासी और अनुशासित बनने में भी मदद करते हैं।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में अभिभावकगण और अकादमी से जुड़े लोग मौजूद रहे। अभिभावकों ने बच्चों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि बेल्ट परीक्षा से बच्चों का उत्साह बढ़ता है और उन्हें आगे और मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम के अंत में अकादमी के डायरेक्टर सेंसई मिंटू कुमार सैनी ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और खिलाड़ियों का आभार व्यक्त किया।


