Homeउत्तर प्रदेशआज का पौधा, कल बनेगा गौवंश का प्राकृतिक आहार

आज का पौधा, कल बनेगा गौवंश का प्राकृतिक आहार

गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने की अनूठी पहल, 100 से अधिक बहुवर्षीय पौधे रोपे

बरेली। गौसेवा को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए वन विभाग, बरेली की ओर से गौआहार वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। अभियान का उद्देश्य आने वाले वर्षों में गौवंश के लिए प्राकृतिक एवं पौष्टिक आहार के स्थायी स्रोत तैयार करने के साथ-साथ हरित क्षेत्र का विस्तार करना रहा। कार्यक्रम में 100 से अधिक उपयोगी एवं बहुवर्षीय वृक्षों का रोपण किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), वन एवं पर्यावरण, जंतु उद्यान तथा जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार रहे। उन्होंने पौधारोपण कर अभियान को आगे बढ़ाया और पर्यावरण संरक्षण के साथ पशुधन के लिए प्राकृतिक संसाधन विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

अभियान में डॉ. तनु जैन, मुख्य अधिशासी अधिकारी, छावनी परिषद बरेली ने सक्रिय सहभागिता करते हुए पौधारोपण किया। उन्होंने कहा कि आज लगाया गया पौधा केवल पर्यावरण को हरा-भरा करने का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाले समय में गौवंश के लिए प्राकृतिक आहार का महत्वपूर्ण स्रोत भी बन सकता है।

पत्तियां और फल बनेंगे प्राकृतिक आहार

अभियान के तहत ऐसे वृक्षों और पौधों का चयन किया गया है, जो बड़े होकर अपनी पत्तियों, फलों और अन्य जैविक सामग्री के माध्यम से गौवंश के लिए उपयोगी आहार उपलब्ध करा सकें। इस तरह यह अभियान केवल एक दिन के पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए प्राकृतिक आहार और हरित संसाधन तैयार करने की दीर्घकालिक पहल है।

मुख्य अतिथि डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। यदि उपयोगी प्रजातियों का चयन कर पौधे लगाए जाएं और उनकी नियमित देखभाल की जाए तो यही वृक्ष भविष्य में पशुधन, जैव विविधता और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बन सकते हैं।

प्रकृति, पशु और मानव—तीनों के लिए लाभकारी

डॉ. तनु जैन ने कहा कि गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। आज लगाए गए पौधों की देखभाल कर उन्हें विकसित किया जाए तो आने वाले वर्षों में इनसे पर्यावरण को लाभ मिलेगा और गौवंश के लिए प्राकृतिक आहार भी उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे हरित संसाधन विकसित करना जरूरी है, जिनका लाभ प्रकृति, पशु कल्याण और मानव समाज तीनों को मिले।

कार्यक्रम के दौरान वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित मौजूद लोगों ने पौधों के संरक्षण और नियमित देखभाल का संकल्प लिया। अभियान ने यह संदेश दिया कि एक पौधा लगाना केवल आज की जरूरत पूरी करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों और गौवंश के लिए प्राकृतिक संसाधन तैयार करना भी है।

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