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बरेली हिंसा: करीब एक साल से जेल में बंद मौलाना तौकीर रजा को हाईकोर्ट से झटका, डॉ. नफीस की तीन मामलों में बेल खारिज

बरेली, सितंबर 2025 को बरेली में हुई हिंसा से जुड़े मामलों में आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान और डॉ. नफीस को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। करीब एक साल से जेल में बंद मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। वहीं डॉ. नफीस को भी कोतवाली थाने में दर्ज तीन अलग-अलग मामलों में राहत नहीं मिली। अपराध संख्या 502, 492 और 489 से जुड़े मामलों में डॉ. नफीस की जमानत अर्जियां खारिज हुई हैं।

सरकार की ओर से एजीए नितेश श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में पक्ष रखते हुए जमानत का विरोध किया। अभियोजन की ओर से केस डायरी में उपलब्ध साक्ष्यों को अदालत के समक्ष पेश किया गया। वहीं बरेली हिंसा से जुड़े बारादरी और कोतवाली के प्रमुख मुकदमों की विवेचना वर्तमान में थाना कैंट प्रभारी संजय कुमार धीर द्वारा किए जाने की जानकारी है।

करीब एक साल से जेल में हैं तौकीर रजा और डॉ. नफीस

26 सितंबर 2025 की हिंसा के बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसी क्रम में मौलाना तौकीर रजा और डॉ. नफीस भी जेल भेजे गए थे। दोनों को जेल में रहते हुए करीब एक साल होने वाला है। मौलाना तौकीर रजा वर्तमान में फर्रुखाबाद की फतेहगढ़ जेल में बंद हैं।

जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अब फैसला आने पर तौकीर रजा को राहत नहीं मिली है।

सरकार की ओर से AGA नितेश श्रीवास्तव ने रखा पक्ष

हाईकोर्ट में सरकार की ओर से एजीए नितेश श्रीवास्तव ने अभियोजन का पक्ष मजबूती से रखा। अभियोजन की ओर से केस डायरी में दर्ज साक्ष्यों और विवेचना के दौरान जुटाई गई सामग्री को अदालत के सामने प्रस्तुत करते हुए जमानत का विरोध किया गया।

सरकार का पक्ष था कि मामले की प्रकृति और केस डायरी में उपलब्ध सामग्री को देखते हुए आरोपियों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। बचाव पक्ष ने इसके विपरीत जमानत के समर्थन में अपनी दलीलें पेश कीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राहत देने से इनकार कर दिया।

तौकीर रजा को कथित साजिश का प्रमुख आरोपी बता रही पुलिस

बरेली पुलिस और अभियोजन हिंसा से जुड़े मामलों में मौलाना तौकीर रजा की कथित भूमिका को अहम बताते रहे हैं। अभियोजन का आरोप है कि हिंसा से पहले लोगों से इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में एकत्र होने का आह्वान किया गया था। बड़ी संख्या में लोगों के वहां पहुंचने और पुलिस द्वारा उन्हें रोकने के दौरान हालात बिगड़ने का आरोप है।पुलिस ने विवेचना में तौकीर रजा को हिंसा की कथित साजिश में प्रमुख आरोपी बताया है। दूसरी ओर बचाव पक्ष इन आरोपों से इनकार करता रहा है और उसका दावा है कि उन्हें राजनीतिक कारणों से मुकदमों में फंसाया गया।

बचाव पक्ष की दलील—घटनास्थल पर नहीं थे मौलाना

तौकीर रजा की तरफ से जमानत के समर्थन में कहा गया कि वह हिंसा के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे और उन्होंने किसी को हिंसा के लिए उकसाया नहीं था। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने के बाद उसे रद्द कर दिया गया था।अभियोजन ने इसके जवाब में भीड़ एकत्र होने के कथित आह्वान और केस डायरी में मौजूद अन्य सामग्री का हवाला देकर जमानत का विरोध किया। अदालत ने उपलब्ध सामग्री और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद जमानत नहीं दी।

डॉ. नफीस की अपराध संख्या 502, 492 और 489 में बेल खारिज

डॉ. नफीस को भी हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोतवाली थाने में दर्ज अपराध संख्या 502, 492 और 489 से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में उनकी जमानत अर्जियां खारिज हुई हैं। डॉ. नफीस भी करीब एक साल से जेल में हैं। तीनों मामलों में राहत नहीं मिलने के कारण फिलहाल उनके जेल से बाहर आने का रास्ता नहीं खुल सका है।

कैंट प्रभारी संजय कुमार धीर कर रहे प्रमुख मामलों की विवेचना

बरेली हिंसा से जुड़े मुकदमों की जांच भी इस पूरे प्रकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बारादरी और कोतवाली थानों में दर्ज प्रमुख मुकदमों की विवेचना वर्तमान थाना कैंट प्रभारी संजय कुमार धीर द्वारा की जा रही है। विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और केस डायरी में दर्ज सामग्री को अभियोजन की ओर से न्यायिक कार्यवाही में आधार बनाया जा रहा है।

बारादरी केस में सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत

मौलाना तौकीर रजा को इससे पहले बारादरी थाने में दर्ज हिंसा से जुड़े एक मामले में भी हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली थी। हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद उनकी तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (Special Leave Petition) दाखिल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी एसएलपी खारिज करते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था।अब एक अन्य मामले में हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिलने से उनकी कानूनी मुश्किलें बरकरार हैं।

26 सितंबर की हिंसा के बाद दर्ज हुए थे कई मुकदमे

26 सितंबर 2025 को जुमे की नमाज के बाद बरेली में तनाव और हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। पुलिस के अनुसार कई स्थानों पर भीड़ और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। इसके बाद अलग-अलग थाना क्षेत्रों में मुकदमे दर्ज कर गिरफ्तारियां की गईं।

पुलिस की ओर से आरोपियों पर हिंसा, पुलिस टीम पर हमला और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने समेत विभिन्न आरोप लगाए गए हैं। आरोपियों की ओर से इन आरोपों का विरोध किया जा रहा है।

करीब एक साल से जेल में बंद तौकीर रजा और डॉ. नफीस को ताजा फैसले में भी राहत नहीं मिली है।

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