
बरेली। नगर निगम बरेली और बरेली विकास प्राधिकरण से जुड़े अधिकारियों पर सार्वजनिक तालाबों, पोखरों और जलमग्न क्षेत्रों की बेशकीमती जमीन को कथित रूप से भूमाफियाओं के हवाले करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पूर्व चेयरपर्सन, जिला सहकारी संघ लिमिटेड महेश पांडेय ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को विस्तृत शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। शिकायत 25 अगस्त 2026 की है।
महेश पांडेय ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि बरेली नगर निगम क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये की सरकारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जे और निर्माण किए गए। उनका आरोप है कि नगर निगम और बरेली विकास प्राधिकरण में तैनात कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से तालाबों को पाटकर कॉलोनियां और व्यावसायिक प्रतिष्ठान तक विकसित कर दिए गए। शिकायत में इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक होने का दावा किया गया है।
शिकायत में सुप्रीम कोर्ट के हिंच लाल तिवारी बनाम कमला देवी, वर्ष 2001 के फैसले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक तालाबों और जलस्रोतों को संरक्षित एवं पुनर्स्थापित करने संबंधी न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। महेश पांडेय का कहना है कि आईजीआरएस समेत विभिन्न स्तरों पर की गई शिकायतों का भी कथित रूप से मनमाने तरीके से निस्तारण किया गया।
शिकायत में सिविल लाइंस क्षेत्र के पूर्व राजस्व ग्राम कस्बा हाफिजपुर के गाटा संख्या 488 का उल्लेख किया गया है। दावा है कि करीब 48,500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाली यह भूमि पुराने राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज थी। आरोप है कि बाद में इसे पाटकर यहां कॉलोनी विकसित कर दी गई।
इसी तरह राजस्व ग्राम ब्रह्मपुरा के गाटा संख्या 155 से 170 तक की भूमि का भी जिक्र किया गया है। शिकायत के अनुसार करीब 248 बीघा पुख्ता, यानी लगभग सात लाख 56 हजार वर्ग गज भूमि जलमग्न क्षेत्र और तालाब के रूप में दर्ज थी। महेश पांडेय का आरोप है कि नगर निगम स्तर से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी होने के बाद इस क्षेत्र में कॉलोनियां और बैंक्वेट हॉल विकसित हो गए। शिकायत में रेजीडेंसी गार्डन और सिटी हार्ट कॉलोनी का भी उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा बिहारमान नगला के गाटा संख्या 130, 131, 132 और 133 की करीब 85 हजार वर्ग मीटर भूमि को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस भूमि को पाटकर बेच दिया गया और इससे संबंधित न्यायालयी मामलों में सरकारी पक्ष को मजबूती से नहीं रखा गया, जिससे शासन की संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
महेश पांडेय ने अक्षर विहार तालाब समेत नगर निगम सीमा के करीब सौ अन्य तालाबों की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि पूर्व में तत्कालीन अधिकारियों द्वारा भी इस संबंध में शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। इसमें तत्कालीन नगर मुख्य अधिकारी शशि शेखर सिंह के कार्यकाल का उल्लेख किया गया है। साथ ही तत्कालीन नगर आयुक्त शैलेंद्र चौधरी द्वारा कथित सरकारी जमीन खुर्द-बुर्द किए जाने के मामलों की सीबीआई जांच की संस्तुति शासन को भेजे जाने का भी दावा किया गया है।
महेश पांडेय ने मुख्य सचिव से मांग की है कि सतर्कता विभाग, भ्रष्टाचार निवारण संगठन, राजस्व परिषद और आवास विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर मामले की जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने, संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने तथा तालाबों पर हुए अवैध निर्माण हटाकर उन्हें पुनर्स्थापित कराने की भी मांग की गई है।
फिलहाल ये सभी आरोप महेश पांडेय की शिकायत में किए गए दावे हैं। नगर निगम, बीडीए अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट होगी।


