20 प्रतिशत कमीशन से इनकार पड़ा भारी, कृषि विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप

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प्राकृतिक खेती योजना में 20% कमीशन का आरोप, कर्मचारी ने खटखटाया भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय


कमीशन नहीं दिया तो उत्पीड़न—प्राकृतिक खेती योजना में भ्रष्टाचार का मामला


भास्कर टुडे

बरेली। कृषि विभाग में कार्यरत एक वरिष्ठ तकनीकी सहायक द्वारा विभागीय अधिकारियों पर 20 प्रतिशत अवैध कमीशन मांगने, इनकार करने पर मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न, नौकरी से निकलवाने की धमकी तथा अतिरिक्त प्रभार छीनने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर पीड़ित कर्मचारी ने माननीय विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण, बरेली की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर प्राथमिकी दर्ज कराने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

प्रार्थना पत्र के अनुसार मुनेन्द्र कुमार सैनी कृषि विभाग में वरिष्ठ तकनीकी सहायक ग्रुप ‘बी’ के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें जनपद बरेली में वस्तु विशेषज्ञ (कृषि) आंवला का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। इसी दौरान भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में किसानों को प्रोत्साहन राशि देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना लागू की गई।

आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन के लिए उप कृषि निदेशक कार्यालय, बरेली से जुड़े अधिकारियों द्वारा प्राकृतिक खेती से संबंधित किसानों एवं किसान सखियों के चयन की सूची तैयार कराने के बदले प्रार्थी से 20 प्रतिशत कमीशन अग्रिम रूप से मांगा गया। प्रार्थी द्वारा कमीशन देने से इनकार करने पर उसे 15 अक्टूबर 2025 से 22 अक्टूबर 2025 के बीच कई बार कार्यालय बुलाकर दबाव बनाया गया।

प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया है कि बाद में वस्तु विशेषज्ञ का चार्ज दूसरे अधिकारी (एडीओ कृषि सुनील कुमार) को दे दिया गया, जबकि उन्होंने कोई चार्ज नहीं लिया।

आरोप है कि इसके पश्चात विपक्षी संख्या-2 द्वारा विपक्षी संख्या-1 की उपस्थिति में एक पत्र तैयार कर जिलाधिकारी, बरेली को प्रार्थी के विरुद्ध कार्रवाई के लिए भेजा गया, जिस पर हस्ताक्षर भी कराए गए। प्रार्थी का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उस पर तरह-तरह से दबाव बनाया गया और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

प्रार्थी के अनुसार, उसने उसी समय संबंधित थाने में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने पूरे मामले से संबंधित एक शिकायती प्रार्थना पत्र वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बरेली को दिनांक 13 जनवरी 2026 को रजिस्टर्ड डाक से भेजा, परंतु आरोप है कि इसके बावजूद भी विपक्षीगण के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई।

अब न्याय न मिलने पर प्रार्थी ने भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय की शरण ली है। प्रार्थना पत्र में अदालत से मांग की गई है कि थानाध्यक्ष भोजीपुरा को आदेशित किया जाए कि वे विपक्षी संख्या-1 व 2 के विरुद्ध 20 प्रतिशत कमीशन मांगने, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी, नौकरी से निकलवाने की धमकी तथा मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कर विधिसंगत विवेचना कराएं।

अमर पाल सिंह वर्तमान में डिप्टी डायरेक्टर, कृषि रक्षा के पद पर तैनात हैं, जबकि इससे पूर्व वे डिप्टी डायरेक्टर कृषि का चार्ज संभाल चुके हैं। प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों के संबंध में उनका नाम सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

वादी के अधिवक्ता अजय प्रकाश शर्मा ने बताया कि प्रार्थी से सरकारी योजना के तहत 20 प्रतिशत अवैध कमीशन की मांग की गई थी। कमीशन देने से इनकार करने पर उसे प्रताड़ित किया गया और धमकियां दी गईं। पुलिस स्तर पर कार्रवाई न होने के कारण प्रार्थी ने भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय की शरण ली है और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। मामले में  आज दोनों पक्ष उपस्थित रहे अब अगली सुनवाई 04 फरवरी 2026 को होगी

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