
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज होती दिख रही है। इसी बीच हरदोई के जिला आबकारी अधिकारी के.पी. सिंह की समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ एक कथित तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है।
वायरल हो रही तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह फोटो समाजवादी पार्टी के लखनऊ स्थित कार्यालय में खींची गई थी। कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि तस्वीर पार्टी के किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड हुई थी, जिसे बाद में हटा लिया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
अधिकारी ने फोटो को बताया डीपफेक
जब इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी के.पी. सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने इस तस्वीर को “डीपफेक” करार दिया। उनका कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई है और उनका इस प्रकार किसी राजनीतिक गतिविधि से जुड़ाव नहीं है।
पत्नी के चुनाव लड़ने की अटकलें
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि के.पी. सिंह की पत्नी शालिनी सिंह समाजवादी पार्टी से टिकट लेने की तैयारी कर रही हैं। हालांकि इस संबंध में न तो शालिनी सिंह और न ही समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।
सेवा नियमों पर उठे सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि कोई सेवारत सरकारी अधिकारी सक्रिय राजनीतिक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो यह सेवा आचरण नियमों का विषय बन सकता है। हालांकि केवल किसी नेता के साथ फोटो होने या पारिवारिक सदस्य के राजनीति में सक्रिय होने से स्वतः नियम उल्लंघन साबित नहीं होता।
फोटो की सत्यता जांच का विषय
डिजिटल युग में डीपफेक तकनीक के बढ़ते मामलों को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी तस्वीरों की सत्यता तय करने के लिए तकनीकी फॉरेंसिक जांच आवश्यक है। फिलहाल यह मामला दावों और प्रतिदावों के बीच उलझा हुआ है।
चुनावी माहौल में बढ़ी संवेदनशीलता
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि चुनाव नज़दीक आने के साथ इस तरह की खबरें और विवाद सामने आते रहते हैं। ऐसे में आधिकारिक पुष्टि और जांच के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाज़ी माना जा रहा है।

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