सड़क किनारे झोलाछाप कर रहे इलाज, स्वास्थ्य विभाग चुप

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बरेल विशेष रिपोर्ट — सड़क किनारे इलाज का खतरनाक खेल, स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल, शहर में अवैध रूप से सड़क किनारे इलाज कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों का धंधा लगातार फल-फूल रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। शहर के कई व्यस्त चौराहों, बाजारों और ग्रामीण मार्गों पर ऐसे अनधिकृत उपचार केंद्र खुलेआम चल रहे हैं, जहाँ बिना किसी चिकित्सा योग्यता वाले लोग इंजेक्शन, ड्रिप और दवाएं देकर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।

शिकायत होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग चुप 

स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार शिकायतें दर्ज होने के बावजूद विभाग की ओर से न तो कोई ठोस कार्रवाई की जाती है और न ही नियमित निगरानी की जाती है। स्थिति यह है कि कई झोलाछाप डॉक्टर ईंट-भट्ठों, सब्जी मंडियों और चौराहों पर प्लास्टिक की कुर्सी और टेबल लगाकर इंजेक्शन और दवा देने का काम कर रहे हैं। गरीब और अनजान मरीज कम खर्च में इलाज मिलने की उम्मीद से उनकी बातों में आ जाते हैं, लेकिन कई बार यह सस्ता इलाज जानलेवा साबित होता है।

चिकित्सा विशेषज्ञ भी चेतावनी दे चुके हैं कि गलत तरीके से दिए गए इंजेक्शन, बिना जांच के लिखी गई दवाएं और अस्वच्छ माहौल में किया जा रहा इलाज गंभीर बीमारी, संक्रमण, लकवा मौत तक का कारण बन सकता है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की मौन भूमिका पर शहरवासियों में नाराजगी बढ़ रही है।

लोगों का कहना है कि विभाग सिर्फ कागज़ी कार्रवाई तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर न तो कोई अभियान चलता है और न ही इन फर्जी डॉक्टरों पर प्रभावी रोक लगाई जाती है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है। शहरवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ऐसे अवैध उपचार केंद्रों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों की जान जोखिम में पड़ने से बच सके।

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