दिवाली के दौरान बच्चों की सेहत की सुरक्षा: अस्थमा और एलर्जी से बचाव के लिए विशेषज्ञ की सलाह
लेखक: डॉ. Pranshi Agarwal , बाल एलर्जी एवं अस्थमा विशेषज्ञ
दिवाली का त्योहार रोशनी, मिठाइयों और उत्साह से भरा होता है, लेकिन वहीं यह बच्चों में अस्थमा और एलर्जी जैसी समस्याओं को भी बढ़ा सकता है। हर वर्ष इस समय, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में, वायु प्रदूषण अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे बच्चों को साँस की तकलीफ, एलर्जी और बार-बार अस्पताल जाने की नौबत आती है।
बाल अस्थमा और एलर्जी विशेषज्ञ के रूप में, मैंने देखा है कि दिवाली के दौरान बच्चों में अस्थमा के दौरे और एलर्जी की शिकायतें तेजी से बढ़ जाती हैं। इनसे बचने के लिए अभिभावकों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।
🎇 दिवाली में अस्थमा और एलर्जी क्यों बढ़ती है?
दिवाली के समय पटाखों से निकलने वाले हानिकारक रसायन जैसे PM2.5, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड आदि हवा को बेहद जहरीला बना देते हैं। ये सूक्ष्म कण फेफड़ों में जाकर कई समस्याएं पैदा करते हैं:
साँस लेने में दिक्कत (व्हीजिंग)
लगातार खांसी
आंखों में जलन
त्वचा पर एलर्जी
नाक बहना या जाम होना (एलर्जिक राइनाइटिस)
बच्चों में ये समस्याएं अधिक होती हैं क्योंकि उनके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते और वे वयस्कों की तुलना में तेजी से सांस लेते हैं।
🛡️ अभिभावकों के लिए विशेषज्ञ द्वारा सुझाई गई सावधानियां
1. पटाखों से दूर रखें
बच्चों को पटाखों से पूरी तरह दूर रखें।
रोशनी, संगीत और पारंपरिक सजावट से घर में सुरक्षित रूप से दिवाली मनाएं।
2. प्रदूषण अधिक होने पर घर में रखें
सुबह और रात में जब AQI (वायु गुणवत्ता) सबसे ज्यादा खराब होता है, तब बच्चों को बाहर खेलने न भेजें।
मोबाइल ऐप्स के माध्यम से AQI की जांच करें। यदि AQI 150 से ऊपर हो, तो बच्चों को घर के अंदर ही रखें।
3. एयर प्यूरीफायर और मास्क का उपयोग करें
बच्चों के कमरे में HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर लगाएं।
बाहर जाते समय बच्चों को उनके साइज के N95 मास्क पहनाएं।
4. दवाइयों का नियमित सेवन जारी रखें
अस्थमा से ग्रस्त बच्चों को डॉक्टर द्वारा दी गई नियमित दवाइयां और इनहेलर जरूर देते रहें।
रिलीवर इनहेलर (जैसे सैल्बुटामॉल) को हमेशा अपने पास रखें।
त्योहारी व्यस्तता में दवाइयां न छोड़ें।
5. धूल और इत्र जैसी एलर्जी से सावधानी
दिवाली से पहले सफाई के दौरान बच्चों को धूल और परफ्यूम से दूर रखें।
अगरबत्ती, धूपबत्ती और कृत्रिम खुशबुओं से बच्चों को एलर्जी हो सकती है – इनका सीमित प्रयोग करें।
6. स्वस्थ खानपान और हाइड्रेशन
बच्चों को खूब पानी पिलाएं।
ठंडी चीज़ें और बहुत ज्यादा मिठाइयों से परहेज करें।
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल जैसे सेब, अनार और संतरा दें।
7. टीकाकरण करवाना न भूलें
यदि आपका बच्चा अस्थमा ग्रस्त है, तो उसका फ्लू टीका जरूर दिलवाएं। मौसमी संक्रमण प्रदूषण के साथ मिलकर स्थिति को गंभीर बना सकता है।
🚨 कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें?
यदि आपका बच्चा:
बहुत तेजी से सांस ले रहा है,
ठीक से बोल नहीं पा रहा है,
होंठ या नाखून नीले हो रहे हैं,
या इनहेलर बार-बार चाहिए हो रहा है (1 घंटे में 3 बार से ज्यादा),
तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
🌱 एक सुरक्षित और हरित दिवाली की ओर कदम
दिवाली उत्सव का समय है, लेकिन इस दौरान हमें बच्चों की सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए। हरित दिवाली (Green Diwali) को अपनाकर हम न केवल अपने बच्चों को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक स्वच्छ वातावरण दे सकते हैं।
इस बार रोशनी और खुशी के साथ, सजगता और ज़िम्मेदारी से दिवाली मनाएं।
डॉ. प्रांशी अग्रवाल एक बाल चिकित्सा एलर्जी और अस्थमा विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने प्रसिद्ध केजीएमयू लखनऊ से बाल चिकित्सा में एमडी की पढ़ाई पूरी की है, इसके बाद उन्होंने सर गंगाराम अस्पताल दिल्ली से बाल चिकित्सा एलर्जी और अस्थमा में सुपरस्पेशलाइजेशन किया है।

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