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नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण स्थिति के बीच एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दोनों देशों ने युद्धविराम पर सहमति जताई है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने शनिवार को एक विशेष ब्रीफिंग में बताया कि पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) ने आज दोपहर 3:35 बजे भारतीय DGMO को फोन किया। इस बातचीत में दोनों पक्षों ने भारतीय मानक समयानुसार शाम 5:00 बजे से जमीन, हवा और समुद्र में सभी तरह की गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई बंद करने का फैसला किया।
मिस्री ने कहा, “आज दोनों पक्षों को इस सहमति को लागू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। इसके साथ ही, दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशक 12 मई को दोपहर 12:00 बजे एक बार फिर बातचीत करेंगे।” यह युद्धविराम ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़े तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ
ऑपरेशन सिंदूर, जिसे भारत ने 6-7 मई की रात को अंजाम दिया था, 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था। इस हमले में 25 भारतीय और 1 नेपाली नागरिक की जान गई थी। विदेश सचिव ने पहले बताया था कि भारत ने इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के आतंकी शिविर शामिल थे। इस कार्रवाई को भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अंजाम दिया था।

कूटनीतिक प्रयास और अंतरराष्ट्रीय भूमिका
युद्धविराम की घोषणा से पहले भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दावा किया कि अमेरिका की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच यह सहमति बनी। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह मामला दोनों देशों के बीच सीधे तौर पर सुलझाया गया है।
विदेश सचिव ने यह भी दोहराया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख्त नीति पर कायम रहेगा। युद्धविराम के बावजूद, भारत ने साफ किया है कि भविष्य में किसी भी आतंकी हमले को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। दोनों देशों के DGMO की 12 मई को होने वाली बातचीत में आगे की रणनीति और सीजफायर के पालन पर चर्चा होगी।
इस बीच, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर इस युद्धविराम को शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। ब्रिटेन और सऊदी अरब जैसे देशों ने भी दोनों देशों से तनाव कम करने की अपील की थी।
ऑपरेशन सिंदूर: भारत की आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा 6-7 मई 2025 की रात को अंजाम दिया गया एक सटीक और समन्वित सैन्य अभियान था। इसका उद्देश्य पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को नष्ट करना था। यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू की गई, जिसमें 25 भारतीय और 1 नेपाली नागरिक मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने ली थी। ऑपरेशन का नाम “सिंदूर” उन महिलाओं को समर्पित था, जिनके पतियों की इस हमले में हत्या की गई थी, जो भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है।
ऑपरेशन का विवरण
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समय और अवधि: ऑपरेशन 7 मई 2025 को रात 1:05 बजे से 1:30 बजे के बीच 25 मिनट तक चला।
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लक्ष्य: भारत ने पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन, और जैश लश्कर-7 के शिविर शामिल थे। इनमें मुरिदके (LeT मुख्यालय), मुजफ्फराबाद, बहावलपुर, सियालकोट, कोटली, बाघ, गुलपुर, भिंबेर, और शकरगढ़ के ठिकाने थे।
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हथियार और रणनीति: भारतीय वायुसेना ने हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों और घातक ड्रोनों (लॉयटरिंग म्यूनिशंस) का उपयोग किया, जबकि थलसेना ने सतह से सतह पर मिसाइलें दागीं। यह एक संयुक्त ऑपरेशन था, जिसमें तीनों सेनाओं (थल, वायु, और नौसेना) ने भाग लिया। हमले भारतीय सरजमीं से ही किए गए, और खुफिया जानकारी RAW और अन्य एजेंसियों से प्राप्त हुई थी।
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परिणाम: अनुमानित 80-100 से अधिक आतंकवादी मारे गए, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य और 4 सहयोगी शामिल थे। बहावलपुर में अकेले 50 आतंकी ढेर हुए। किसी भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया, जिससे भारत ने संयम और सटीकता का प्रदर्शन किया।
ऑपरेशन का उद्देश्य
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प्रतिशोध: पहलगाम हमले का बदला लेना, जिसमें निर्दोष नागरिकों की हत्या की गई थी।
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आतंकवाद पर प्रहार: पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी ढांचों को नष्ट कर भारत के खिलाफ हमलों की योजना को विफल करना।
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रणनीतिक संदेश: पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी देना कि भारत आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर सीमा पार कार्रवाई करेगा।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ऑपरेशन को “कायराना” और “युद्ध की कार्रवाई” करार दिया, दावा किया कि नागरिक हताहत हुए। हालांकि, भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि केवल आतंकी ठिकाने निशाने पर थे।
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पाकिस्तान ने 7-8 मई की रात को भारत के 15 सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले की कोशिश की, लेकिन भारत के S-400 डिफेंस सिस्टम और इंटीग्रेटेड काउंटर UAS ग्रिड ने इन्हें नाकाम कर दिया।
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पाकिस्तान ने LoC पर पुंछ, नौशेरा, और कुपवाड़ा में गोलीबारी कर युद्धविराम का उल्लंघन किया, जिसमें भारतीय सेना का एक जवान शहीद हुआ।
युद्धविराम और कूटनीति
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10 मई 2025 को, दोनों देशों के DGMO के बीच बातचीत के बाद, शाम 5:00 बजे से जमीन, हवा, और समुद्र में गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों को इसकी पालना के निर्देश दिए गए, और 12 मई को दोपहर 12:00 बजे फिर बातचीत होगी।
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विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 13 देशों के राजदूतों को ऑपरेशन की जानकारी दी, यह स्पष्ट करते हुए कि यह कार्रवाई विश्वसनीय खुफिया जानकारी पर आधारित थी और इसका लक्ष्य आतंकवाद को खत्म करना था।
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अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया में, अमेरिका, ब्रिटेन, और सऊदी अरब ने संयम बरतने की अपील की। ब्रिटेन के पूर्व पीएम ऋषि सुनक ने भारत के कदम की सराहना की, जबकि चीन ने तटस्थ रुख अपनाया। तुर्की को छोड़कर किसी ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन नहीं किया।
भारत की स्थिति
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भारत ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ था, न कि पाकिस्तानी सेना या नागरिकों के खिलाफ।
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विदेश मंत्रालय ने कहा कि भविष्य में कोई भी आतंकी हमला युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा।
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ऑपरेशन की सफलता के बाद, पीएम नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, और तीनों सेना प्रमुखों ने इसकी निगरानी की और इसे “नए भारत” की ताकत का प्रतीक बताया।
आलोचना और बहस
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कुछ आलोचकों, जैसे X पर@Soma_dhar25
, ने कहा कि ऑपरेशन से आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होगा और पाकिस्तान सुधरेगा नहीं। उनका मानना है कि भारत को और आक्रामक रुख अपनाना चाहिए।
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संयुक्त राष्ट्र और कुछ वैश्विक थिंक टैंकों ने तनाव बढ़ने और नागरिक नुकसान की आशंका जताई, साथ ही बातचीत के जरिए समाधान की वकालत की।
ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य और कूटनीतिक ताकत को दर्शाया। यह 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक की तरह आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति का हिस्सा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का प्रॉक्सी युद्ध और चीन का समर्थन भविष्य में चुनौतियां खड़ी कर सकता है। युद्धविराम के बावजूद, LoC पर तनाव और आतंकी गतिविधियों की आशंका बनी हुई है।

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