बरेली-सितारगंज हाईवे भूमि अधिग्रहण घोटाले के मामले में शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए दो अफसरों को निलंबित कर दिया है। नियुक्ति अनुभाग के सचिव एम. देवराज ने बरेली के पूर्व एडीएम (न्यायिक) आशीष कुमार और मऊ के मुख्य राजस्व अधिकारी मदन कुमार के खिलाफ आरोप पत्र तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
तीन दिन में देना होगा जवाब
सचिव ने डीएम बरेली रविन्द्र कुमार को तीन दिन के भीतर साक्ष्यों के साथ आरोप पत्र जारी कर शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। दोनों अफसरों को 13 फरवरी को गठित दो सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर निलंबित किया गया था। जांच में दोनों को मामले में लापरवाही बरतने और सम्यक परीक्षण न करने का दोषी पाया गया।
क्या है पूरा मामला?
बरेली-सितारगंज हाईवे (एनएच-74, अब एनएच-30) और एनएच-530 बी रिंग रोड निर्माण के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में अनियमितताओं की जांच के लिए डीएम बरेली ने दो सदस्यीय समिति गठित की थी। जांच में विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी और तत्कालीन एडीएम (न्यायिक) आशीष कुमार (पीसीएस, 2015 बैच) प्रथमदृष्टया दोषी पाए गए।
राज्यपाल के आदेश पर कार्रवाई
राज्यपाल के आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के तहत तत्काल प्रभाव से आशीष कुमार को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। इसी तरह, मदन कुमार (पीसीएस, 2012 बैच), जो उस समय विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी बरेली के पद पर तैनात थे, को भी प्रथमदृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि में आधा वेतन
निलंबन की अवधि में दोनों अफसरों को आधा वेतन मिलेगा। वित्तीय नियमों के अनुसार, उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा, जबकि महंगाई भत्ता नहीं मिलेगा। अन्य भत्तों का भुगतान तभी होगा जब वे यह प्रमाणित करेंगे कि वे किसी अन्य व्यवसाय या सेवायोजन में संलग्न नहीं हैं।
आदेश की तामील
डीएम बरेली और डीएम मऊ ने सचिव के निर्देशानुसार आदेश की कॉपी दोनों अफसरों को सौंप दी है और इसकी सूचना शासन को भेज दी गई है। इस प्रकरण को लेकर प्रशासनिक हलकों में हलचल मची हुई है।

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